क्‍या अम‍ेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को मिल पाएगा नोबेल पुरस्‍कार? अचानक क्‍यों होने लगी चर्चा

Nobel Peace Prize: नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि कई देशों की तरफ से उनका नाम नॉमिनेट किया गया है.
अम‍ेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप

अम‍ेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप

Nobel Peace Prize: दुन‍िया में एक तरफ युद्ध से लोग परेशान हैं, तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ख्वाहिशें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. उनका नोबेल शांति पुरस्कार को पाने की जिद खत्म नहीं हुई है. एक बार फ‍िर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर वे चर्चा में हैं.

नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी के अनुसार इस साल कुल 287 उम्मीदवारों को नॉमिनेशन किया है. जिनमें से 200 से ज्यादा लोगों के साथ ही कई संगठन भी शामिल हैं. हालांकि समिति के नियम के मुताबिक किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. लेकिन विभिन्न देशों के नेताओं की तरफ से ट्रंप का नाम प्रस्तावित किए जाने की बात सामने आई है.

क्यों चर्चा में है ट्रंप का नाम?

ऐसा पहली बार नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का नाम नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर चर्चा में आया हो, इससे पहले साल 2025 नोबेल शांति पुरस्कार नॉमिनेट किए जाने की खबरें भी सामने आईं थीं. खासतौर पर मध्य पूर्व में ईरान-इजरायल तनाव कम कराने और युद्ध विराम की कोशिशों को इसके पीछे वजह बताया गया है.

ट्रंप के फैसले उनपर ही पड़ सकते हैं भारी

दिलचस्प बात यह है कि जहां एक ओर ट्रंप को शांति प्रयासों के लिए तारीफ हो रही है .वहीं दूसरी ओर अमेरिका-ईरान तनाव अभी भी चरम पर है.हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत ठप पड़ी है और परमाणु मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है.

यही नहीं, ईरान के साथ जारी टकराव और सैन्य गतिविधियों ने ट्रंप की शांति छवि पर सवाल भी खड़े किए हैं.विश्लेषकों का मानना है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो यह नोबेल दावेदारी को कमजोर कर सकता है.

राजनीति बनाम शांति की बहस

ट्रंप को लेकर दुनिया दो हिस्सों में बंटी नजर आती है.एक पक्ष उन्हें “डील मेकर” और संघर्ष कम करने वाला नेता बताता है, तो दूसरा पक्ष उनके फैसलों को टकराव बढ़ाने वाला मानता है.इस बीच नोबेल कमेटी का रुख साफ है.नामांकन प्रक्रिया गोपनीय रहती है और असली महत्व सिर्फ विजेता की घोषणा का होता है.

अब सबकी नजर अक्टूबर 2026 पर है, जब नोबेल शांति पुरस्कार के विजेता का ऐलान होगा.तब तक ट्रंप का नाम सिर्फ चर्चा और कयासों में ही रहेगा. लेकिन इतना तय है कि उनकी उम्मीदवारी ने दुनियाभर की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है.

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