स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाज पर अमेरिका का हमला, चीफ इंजीनियर समेत तीन भारतीय नाविकों की मौत

US attack on Oman coast: होर्मुज स्ट्रेट के पास ओमान तट पर अमेरिका के हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई. इस मामले पर विदेश मंत्रालय ने दुख जताया है. इसके साथ ही अमेरिका की इस कार्रवाई का विरोध भी किया है.
thai cargo ship attacked in Strait Of Hormuz 23 crew members rescued

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज में जहजा पर हमला (फाइल फोटो)

US attack on Oman coast: ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फ‍िर तनाव बढ़ गया है. इसका सीधा असर अब दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट पर दिखने लगा है. होर्मुज के पास ही बुधवार रात हुए हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई.  पालाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर एमटी सेट्टेबेलो (MT Settebello) पर अमेरिकी सेना ने कार्रवाई की थी.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा है कि जहाज ईरानी तेल ले जा रहा था और अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन कर रहा था. इसी दौरान जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाकर हमला किया गया, जिससे भीषण आग लग गई और जहाज बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया.  

जहाज पर कुल 28 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें 24 भारतीय नागरिक शामिल थे. हमले के बाद 21 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि तीन भारतीय नाविक लापता हो गए थे. बाद में उनकी मौत की पुष्टि हुई.

कहां रहने वाले हैं मृतक नाविक  

मृतकों में आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम निवासी चीफ इंजीनियर पत्नाला सुरेश का नाम भी शामिल बताया जा रहा है. अन्य भारतीय नाविकों की पहचान को लेकर भी संबंधित एजेंसियां परिवारों को सूचना दे रही हैं.

भारत ने जताया विरोध

इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है.  विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है. भारत ने साफ कहा कि एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला बेहद गंभीर मामला है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है.

संपर्क में विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारतीय दूतावास ओमान प्रशासन और स्थानीय एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है. बचाए गए भारतीय नाविकों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है. यह घटना ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है.खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

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