Bhopal News: भोपाल की संजीवनी क्लिनिक भगवान भरोसे, कंप्यूटर ऑपरेटर और हाउसकीपिंग कर्मचारी बने ‘डॉक्टर’

Bhopal News: मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लगातार तस्वीर सामने आ रही है, जहां संजीवनी क्लिनिक भगवान के भरोसे चल रही है. उससे पता चल रहा है कि ना ही क्लीनिक पर डॉक्टर हैं और ना ही नर्सिंग स्टाफ...केवल कंप्यूटर ऑपरेटर और हाउसकीपिंग के लोग मरीज का इलाज करते दिखाई दे रहे हैं.
Madhya Pradesh Sanjeevani Clinic

भोपाल संजीवनी क्लिनिक

Bhopal News: मध्य प्रदेश में लोगों को सही उपचार मिले जिसके लिए सरकार ने संजीवनी क्लिनिक शुरू की थी, मगर संजीवनी क्लिनिक भगवान भरोसे चल रही है, क्योंकि ना ही क्लीनिक में डॉक्टर है ना ही नर्सिंग स्टाफ. कंप्यूटर ऑपरेटर और हाउसकीपिंग करने वाले लोग मरीजों का इलाज कर रहे हैं.

पड़ताल में क्या आया सामने?

मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लगातार तस्वीर सामने आ रही है, जहां संजीवनी क्लिनिक भगवान के भरोसे चल रही है. उससे पता चल रहा है कि ना ही क्लीनिक पर डॉक्टर हैं और ना ही नर्सिंग स्टाफ…केवल कंप्यूटर ऑपरेटर और हाउसकीपिंग के लोग मरीज का इलाज करते दिखाई दे रहे हैं. क्लीनिक में डॉक्टर ही नहीं हैं, बल्कि हाउसकीपिंग और कंप्यूटर ऑपरेटर मरीज का इलाज कर गोली दवाई दे रहे हैं. पूछने पर कर्मचारियों ने बताया कि डॉक्टर साहब अभी नहीं है . नर्सिंग स्टाफ के बारे में पूछने पर कर्मचारी कई बहाने देते दिखाई दिए.

गोविंदपुरा संजीवनी क्लीनिक का भी यही हाल

विस्तार न्यूज ने पड़ताल में पाया कि गोविंदपुरा संजीवनी क्लीनिक का भी यही हाल है, जहां मरीज तो मिले मगर मरीजों का इलाज करने के लिए ओपीडी के डॉक्टर नहीं, बल्कि दंत चिकित्सक डॉक्टर इलाज कर रही हैं. जब डॉक्टर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनके पास एक्सपीरियंस है और वह हर बीमारी का इलाज कर लेती हैं.

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बोर्ड पर शिवराज सिंह चौहान का नाम

  • .हैरानी की बात यह है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव है मगर अधिकारियों की लापरवाही साफ तौर पर दिखाई दे रही है.
  • 3 साल बीत जाने के बाद भी संजीवनी क्लीनिक के बॉर्ड पर अभी भी मुख्यमंत्री के तौर पर शिवराज सिंह चौहान का नाम है.

अधिकारियों ने माना कि डॉक्टरों की है कमी

पूरे प्रदेश में ऐसे हालात देखे जा रहे हैं, जहां संजीवनी क्लीनिक में डॉक्टरों की कमी है. भोपाल के सीएमएचओ मनीष शर्मा का कहना है कि संजीवनी क्लीनिक में डॉक्टरों की कमी है और कुछ नर्सिंग स्टाफ की जिसको लेकर लगातार प्रयास किया जा रहा है कि डॉक्टरों की कमी पूरी की जाए.

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