‘कर्मचारी की मौत के बाद भी मिलेगा प्रमोशन’, MP हाई कोर्ट ने कहा-विभाग की लापरवाही से हक नहीं मार सकते

डॉ राधाकृष्ण शर्मा ने लगभग 18 सालों तक प्रमोशन के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी, लेकिन इस दौरान उनकी मौत हो गई. डॉ शर्मा की मौत के बाद उनके बेटे रमन शर्मा ने कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार उन्हें जीत मिली.
Gwalior Bench of MP High Court (File Photo)

MP हाई कोर्ट की ग्वालयिर खंडपीठ(File Photo)

MP Promotion News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने प्रमोशन के मामले में एक बड़ा फैसला दिया है. हाई कोर्ट की खंडपीठ ने एक ऐसे अधिकारी को प्रमोशन देने का फैसला सुनाया है, जो अब इस दुनिया में नहीं है. कोर्ट ने एग्रीकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर रहे डॉ. राधाकृष्ण शर्मा को साल 2002 से प्रमोशन देने का आदेश दिया है, खास बात ये है कि उनकी मौत हो चुकी है.

2008 में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था

दरअसल डॉ राधाकृष्ण शर्मा एग्रीकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे. साल 2002 में विभाग में कई लोगों का प्रमोशन किया गया. यहां तक कि उनके जूनियर का भी प्रमोशन हुआ, लेकिन डॉ राधाकृष्ण का प्रमोशन रोक दिया गया, इसके पीछे विभाग ने तर्क दिया कि अधिकारी के ऊपर आपराधिक केस चल रहा है. लेकिन कुछ सालों बाद वह आपराधिक मामले में बरी हो गए. इसके बाद उन्होंने साल 2008 में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. लेकिन मामला कोर्ट में था, तभी इस दौरान उनकी मौत हो गई.

पिता की मौत के बाद बेटे ने केस लड़ा

डॉ राधाकृष्ण शर्मा ने लगभग 18 सालों तक प्रमोशन के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी, लेकिन इस दौरान उनकी मौत हो गई. डॉ शर्मा की मौत के बाद उनके बेटे रमन शर्मा ने कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार उन्हें जीत मिली. हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने डॉ राधाकृष्ण शर्मा के हक में फैसला सुनाते हुए 28 अक्टूबर 2002 से उन्हें प्रमोशन देने का फैसला सुनाया है. इसके बाद परिवार को निर्धारित तारीख से पूरा एरियर,सैलरी और अन्य लाभ परिवार को देने का आदेश सुनाया है.

‘गलती अधिकारी की नहीं, विभाग की लापरवाही है’

हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने कहा मामले पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है. कोर्ट ने कहा कि इसमें गलती डॉ राधाकृष्ण शर्मा की नहीं थी. यह विभाग की लापरवाही है. विभाग की गलती से योग्य अधिकारी या कर्मचारी के प्रमोशन को नहीं रोका जा सकता है और ना ही हक मारा जा सकता है.

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