कूनो नेशनल पार्क में फिर गूंजी किलकारी! भारत में जन्मी चीता गामिनी ने 4 शावकों को दिया जन्म

Kuno National Park: लगभग 25 माह की भारतीय मूल की मादा चीता ‘गामिनी’ ने शनिवार को जंगल में चार शावकों को जन्म दिया है. यह घटना भारत में चीतों के पुनर्वास कार्यक्रम के तहत एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है.
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चीता गामिनी ने 4 शावकों को दिया जन्म

Kuno National Park (श्योपुर से हेम कुमार तिवारी की रिपोर्ट): मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क से खुशखबरी सामने आई है. प्रोजेक्ट चीता को लेकर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है. भारत में जन्मी मादा चीता ‘गामिनी’ ने 4 शावकों को जन्म दिया है. ये एमपी के साथ-साथ पूरे देश के लिए शानदार खबर है.

25 महीने पहले जन्मी थी गामिनी

लगभग 25 माह की भारतीय मूल की मादा चीता ‘गामिनी’ ने शनिवार को जंगल में चार शावकों को जन्म दिया है. यह घटना भारत में चीतों के पुनर्वास कार्यक्रम के तहत एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है. जानकारी के अनुसार, यह पहली बार है जब वर्ष 2022 में शुरू हुए चीता पुनर्वास कार्यक्रम के बाद किसी चीता ने प्राकृतिक जंगल वातावरण में शावकों को जन्म दिया है. खास बात यह भी है कि किसी भारतीय मूल की मादा चीता द्वारा यह पहली सफल प्रसूति मानी जा रही है, जिससे परियोजना को नई दिशा और मजबूती मिली है.

वन विभाग ने इसे ऐतिहासिक बताया

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक वर्ष से अधिक समय से यह मादा चीता खुले जंगल में रह रही थी और पूरी तरह प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप ढल चुकी थी. ऐसे में जंगल में शावकों का जन्म होना इस बात का संकेत है कि कूनो का पर्यावरण अब चीतों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है. मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) उत्तम कुमार शर्मा ने इस घटना की पुष्टि करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि यह सफलता परियोजना के उस मुख्य उद्देश्य की पूर्ति की दिशा में बड़ा कदम है, जिसमें चीतों को प्राकृतिक परिस्थितियों में स्थापित करना और उनका प्रजनन सुनिश्चित करना शामिल है.

केंद्रीय मंत्री ने खुशी जाहिर की

इस उपलब्धि को लेकर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर खुशी जताई है. उन्होंने इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताते हुए वन विभाग की टीम और सभी संबंधित कर्मचारियों को बधाई दी है.

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भारत के लिए गर्व की बात

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता कूनो में कार्यरत वन अधिकारियों, पशु चिकित्सकों और फील्ड स्टाफ के समर्पण और अथक प्रयासों का परिणाम है. यह घटना न केवल भारत में चीतों की वापसी को मजबूती देती है, बल्कि भविष्य में उनकी संख्या बढ़ने की उम्मीद भी जगाती है. कुल मिलाकर, कूनो नेशनल पार्क में हुआ यह जन्म पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गया है और चीता संरक्षण अभियान को नई ऊर्जा प्रदान करता है.

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