देवास में विश्वविद्यालय की बड़ी लापरवाही! केपी कॉलेज के 35 छात्र बीए फाइनल ईयर का नहीं दे सके एग्जाम

वहीं पूरे मामले पर केपी कॉलेज के प्राचार्य एसपीएस राणा का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन से चर्चा की जा रही है. अगर संभावना बन पाई तो दोबारा परीक्षा को आयोजित करवाया जाएगा. जिससे कि विद्यार्थियों को सप्लीमेंट्री ना देना पड़े.
Students angry over not being able to appear for the examination in KP College staged a protest.

केपी कॉलेज में परीक्षा ना दे पाने से नाराज छात्रों ने प्रदर्शन किया.

Dewas News: मध्य प्रदेश के देवास विश्वविद्यालय में बड़ी लापरवाही सामने आई है. यहां केपी कॉलेज के बीए फाइनल ईयर के 35 स्टूडेंट्स परीक्षा नहीं दे सके हैं. शुक्रवार को छात्र परीक्षा देने गए थे, लेकिन जब वो परीक्षा देने कॉलेज पहुंचे तो उनके होश उड़ गए. छात्रों को बताया गया कि परीक्षा तो दिन पहले ही यानी 22 अप्रैल को हो चुकी है.

टाइम टेबल बदलने के कारण छूट गया एग्जाम

जो छात्र परीक्षा देने से वंचित रह गए, उन्होंने बताया कि परीक्षा ना दे पाने का कारण विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से शेड्यूल में परिवर्तन कर देना है. छात्रों ने बताया कि पहले टाइम टेबल के मुताबिक फॉरेन पॉलिसी समेत कई विषयों की परीक्षा 22 अप्रैल को होनी थी. लेकिन परीक्षा की तारीख अचानक बदल दी गई. जिसकी सभी को जानकारी नहीं मिल सकी और एग्जाम नहीं दे पाए. छात्रों का आरोप है कि परीक्षा की तारीख के बदलाव को लेकर छात्रों तक सही से जानकारी नहीं पहुंचाई गई थी. परीक्षा ना दे पाने वाले छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय पर लापरवाही करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि कोई भी कॉल या मैसेज नहीं आया. ना ही कॉलेज के किसी ग्रुप में टाइम टेबल बदलने को लेकर कोई जानकारी दी गई.

सप्लीमेंट्री परीक्षा के लिए खर्च करने होंगे 2600 रुपये

कॉलेज में लगभग 403 छात्र-छात्राओं का रजिस्ट्रेशन था. लेकिन परीक्षा केवल 371 स्टूडेंट्स ही दे सके. जबकि 35 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल नहीं हो सके. छात्रों ने कहना है कि लापरवाही विश्वविद्यालय की है, और हमको परेशानी उठानी पड़ रही है. अब सप्लीमेंट्री परीक्षा के लिए 2600 रुपये भरने पड़ेंगे.

वहीं पूरे मामले पर केपी कॉलेज के प्राचार्य एसपीएस राणा का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन से चर्चा की जा रही है. अगर संभावना बन पाई तो दोबारा परीक्षा को आयोजित करवाया जाएगा. जिससे कि विद्यार्थियों को सप्लीमेंट्री ना देना पड़े.

ये भी पढ़ें: बच्चों की जिंदगियों से फिर खिलवाड़! जबलपुर में सरकारी अस्पतालों में दी जाने वाली पैरासिटामोल सिरप का सैंपल जांच में फेल

ज़रूर पढ़ें