उज्जैन की ‘काशी’ के लिए सोनू सूद ने बढ़ाया मदद का हाथ, 15 करोड़ के इंजेक्शन के लिए की फंड रेज करने की अपील
4 साल की मासूम की मदद के लिए एक्टर सोनू सूद आगे आए.
MP News: जरूरतमंदों की मदद करते दिखाई देने वाले बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद एक बार फिर एक मासूम की मदद के लिए आगे आए हैं. 5 महीने की काशी को एक ऐसी दुर्लभ बीमारी है, जिसके इलाज के लिए 15 करोड़ रुपये की जरूरत है. सोनू सूद ने उज्जैन मासूम के लिए फंड रेज करने के लिए लोगों से अपील की है. इसके लिए उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक भावुक वीडियो भी शेयर किया है.
‘हमने पहले भी सबकी मदद से ऐसे बच्चों का इलाज करवाया है’
उज्जैन की 5 महीने की मासूम काशी को दुर्लभ जेनेटिक बीमारी है. इस बीमारी का नाम स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 है. इस बीमारी को ठीक करने के लिए 15 करोड़ के थेरेपी इंजेक्शन की जरूरत है. परिवार इतना सक्षम नहीं है कि वह इतना महंगा इलाज करवा सके. ये इंजेक्शन भारत में मिलता भी नहीं है, विदेश से इसको मंगवाना पड़ता है. मासूम के लिए सोनू सूद ने मदद का हाथ बढ़ाया है.
सोनू सूद ने वीडियो जारी कर कहा, ‘बच्ची को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-1 की बीमारी है. हम सभी को मिलकर बच्ची की मदद करनी है. हम सबने मिलकर पहले भी कई सालों से इस तरह की बीमारी से पीड़ित बच्चों की मदद की है, और उनका सफल इलाज हुआ है. हम सबको अब एक बार फिर से बच्ची की मदद करनी है.’
माता-पिता को सौंपे एक लाख
सोनू सूद के फाउंडेशन ने एक दिन में फंड रेजिंग से एक लाख रुपये जमा कर लिए हैं. फाउंडेशन ने पैसों को काशी के माता-पिता को सौंप भी दिया है. एक्टर का कहना है कि हमसब मिलकर जल्द ही बच्ची के इलाज के लिए पैसा इकट्ठा कर लेंगे. उन्होंने कहा कि फाउंडेशन इसके लिए दौड़-भाग करेगा, जिससे कि काशी के माता-पिता को अच्छी मदद मिल पाए. हमने दिल्ली और इंदौर के बच्चों के लिए पहले भी ऐसे किया है.
समय रहते इलाज नहीं किया तो जिंदगी को खतरा
काशी के माता-पिता खुद पेशे से डॉक्टर हैं. पिता भोपाल एम्स के मेडिसिन विभाग के सीनियर रेसिडेंट और मां हमीदिया अस्पताल में डॉक्टर हैं. माता-पिता ने बताया कि बच्ची का जन्म 14 नवंबर 2025 को हुआ था. लेकिन जन्म के बाद से ही बच्चे के हाथ-पैर में कोई मूवमेंट नहीं हुआ. शुरू में लगा कि कुछ दिनों में सही हो जाएगा, लेकिन बच्ची में कोई भी सुधार नहीं हुआ, इसके बाद जब जांच कराई गई तो पता चला कि उसे SMA टाइप-1 है. इलाज के लिए 15 करोड़ की जरूरत है. डॉक्टर्स का कहना है कि अगर इलाज में ज्यादा देर की गई तो यह बीमारी जिंदगी के लिए खतरा बन सकती है.
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