सिस्टम की संवेदनहीनता बनी परिजनों की बेबसी! अशोकनगर में एंबुलेंस नहीं मिली तो परिजन चादर से ले गए शव
अशोकनगर: परिजनों को नहीं मिली एंबुलेंस
Ashoknagar News: मध्य प्रदेश के अशोकनगर से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है. जहां 15 साल की युवती को खोने के बाद परिजनों को शव ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नसीब नहीं हुई. बेबस और लाचार परिवार वाले पोस्टमार्टम के बाद शव को चादर में लपेटकर ले गए.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, अशोकनगर जिले के खेरोदा चक गांव के रहने वाले रामचरण आदिवासी (41 साल) की 15 साल की बेटी गन्तोबाई ने शनिवार (2 मई 2026) को खुदकुशी कर ली थी. पिता ने पुलिस को बताया कि घटना वाले दिन बेटी ने मां से कहा कि उसे थोड़ा आराम करना है. उस दिन मौसम खराब था, तेज आंधी-तूफान के बीच मां सो गई. बेटी कमरे में गई और फांसी लगी ली. जब मां ने बेटी को देखा तो चीखने लगी. पत्नी की चीख सुनकर पति पहुंचा और रस्सी काट दी.
चादर में शव लेकर गांव के लिए निकले
मृतका का पोस्टमार्टम बहादुरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रविवार (3 मई 2026) को हुआ. शव को ले जाने के लिए परिजन एंबुलेंस का इंतजार करने लगे. करीब 3 घंटे तक एंबुलेंस की व्यवस्था ना होने पर परिवार ने चादर की व्यवस्था की. गांव के लिए रवाना हुए परिजन 200 मीटर चले होंगे. लोगों का दिल पसीजा तो इसके बाद कार की व्यवस्था की गई और घर के लिए परिजनों को भेजा गया.
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शव पर कपड़े भी नहीं
मीडिया रिपोर्ट्स के दौरान महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद नहीं थीं. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक शव पर ना तो कपड़े थे ना ही लाश को पॉलिथिन से लपेटा गया था. शव को अस्पताल से बाहर लाने के लिए स्ट्रेचर और वार्ड बॉय भी नहीं थे.