43 डिग्री की चिलचिलाती धूप में बेटा दंडवत, मां नंगे पाव कर रही नर्मदा परिक्रमा, अंजड़ पहुंचे तो लोगों ने किया स्वागत

MP News: बालकदास बाल ब्रह्मचारी 20 वर्षों से अधिक समय से अन्न का त्याग कर केवल एक समय फलाहार पर जीवन यापन कर रहे हैं. वे मात्र 7 वर्ष की आयु से ब्रह्मचर्य का पालन कर रहे हैं. प्रतिदिन वे 5 से 7 किलोमीटर तक दंडवत परिक्रमा करते हैं
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बड़वानी: नर्मदा परिक्रमा कर रहे मां-बेटे का अंजड़ में हुआ सम्मान

MP News (बड़वानी से सचिन राठौड़ की रिपोर्ट): बड़वानी निमाड़ अंचल में 43 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच एक मां-बेटे की नर्मदा परिक्रमा चर्चा का विषय बनी हुई है. ग्वालियर निवासी बालकदास बाल ब्रह्मचारी दंडवत परिक्रमा कर रहे हैं, जबकि उनकी मां चंद्रकली नंगे पैर अखंड ज्योत लेकर उनके साथ चल रही हैं. यह परिक्रमा 4 अप्रैल को ओंकारेश्वर से शुरू हुई थी और हाल ही में अंजड पहुंची, जहां उनका स्वागत किया गया.

हर दिन 5 से 7 किमी दंडवत परिक्रमा

बालकदास बाल ब्रह्मचारी 20 वर्षों से अधिक समय से अन्न का त्याग कर केवल एक समय फलाहार पर जीवन यापन कर रहे हैं. वे मात्र 7 वर्ष की आयु से ब्रह्मचर्य का पालन कर रहे हैं. प्रतिदिन वे 5 से 7 किलोमीटर तक दंडवत परिक्रमा करते हैं, वह भी बिना किसी चटाई या गद्दे के सीधे तपती जमीन पर.

फलाहारी ग्रहण करती हैं मां

उनकी मां चंद्रकली भी केवल एक समय फलाहार ग्रहण करती हैं और भीषण गर्मी में नंगे पैर अखंड ज्योत लेकर उनके आगे-आगे चलती हैं. यह उनकी दूसरी परिक्रमा है; इससे पहले वे 9 वर्षों की मौन परिक्रमा पूरी कर चुके हैं. वर्तमान परिक्रमा ऋषि मार्कंडेय परंपरा की है, जिसे 7 वर्षों में पूरा करने का उन्होंने संकल्प लिया है. इस यात्रा में उनके साथ लक्ष्मण दास और किरणदेवी भी चल रहे हैं.

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लोगों ने किया स्वागत

विश्राम के दौरान यह मां-बेटा लोगों को मां नर्मदा नदी को स्वच्छ रखने, धर्म और संस्कारों को अपनाने, घर-घर रामायण तथा धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने का संदेश देते हैं. वे बेटियों और गोमाता की रक्षा करने, मांस, मदिरा व नशे से दूर रहने तथा नर्मदा के किनारों से रेत खनन रोकने की अपील भी करते हैं. साथ ही, वे धर्म के नाम पर हो रहे व्यवसाय से सावधान रहने का आग्रह भी करते हैं. हाल ही में अंजड पहुंचने पर ठीकरी रोड पर नगर के धर्मप्रेमी नागरिकों द्वारा उनका पुष्प हार पहनाकर स्वागत-सत्कार किया गया.

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