मुस्लिम शासकों ने मंदिर को मस्जिद में बदला’, भोजशाला विवाद में ASI के वकील ने HC में दिया जवाब

एसआई के वकील ने बताया कि मंदिर से निकाली गई सामग्री से मस्जिद का निर्माण करवाया था. सुनील जैन ने कहा कि यहां देशी-विदेशी यात्री समय-समय पर आते रहे हैं. धार में संस्कृत में लिखे श्लोकों को यात्रियों ने लिपिबद्ध भी किया है.
Dhar Bhojshala Complex (File Photo)

धार भोजशाला परिसर(File Photo)

MP News: धार भोजशाला विवाद पर सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. इसमें एएसआई की तरफ से पेश हुए वकील सुनील जैन ने मुस्लिम पक्ष की तरफ से की गई आपत्तियों का बिंदुवार जवाब दिया. सुनील जैन ने कहा बताया कि भोजशाला मूलरूप से सरस्वती मंदिर है. लेकिन मुस्लिम शासकों ने इसे मस्जिद बना दिया.

1902-03 में हुए सर्वे में मंदिर होने की बात स्पष्ट हो गई थी

सुनील जैन ने साल 1935 में धार दरबार की अधिसूचना जारी करने का जिक्र किया. जैन ने बताया कि धार दरबार ने अधिसूचना जारी कर इसको मस्जिद बताया था. लेकिन उसके पास अधिसूचना जारी करने का हक ही नहीं था. धार दरबार मालिक नहीं अभिभावक की भूमिका में था. जबकि इसके पहले 1902-1903 में हुए सर्वे में ही ये बात स्पष्ट हो गई थी कि भोजशाला मंदिर है.

‘मंदिर से निकाली गई सामग्री से मस्जिद का निर्माण’

इतना ही नहीं एएसआई के वकील ने बताया कि मंदिर से निकाली गई सामग्री से मस्जिद का निर्माण करवाया था. सुनील जैन ने कहा कि यहां देशी-विदेशी यात्री समय-समय पर आते रहे हैं. धार में संस्कृत में लिखे श्लोकों को यात्रियों ने लिपिबद्ध भी किया है.

1904 में राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर की हुई थी घोषणा

एसएसआई की तरफ से पेश हुए वकील ने बताया कि 1904 में ही धार भोजशाला को राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर घोषित कर दिया गया था. वकील ने तत्कालनी ब्रिटिश अधिकारियों के पत्राचार का भी उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि ब्रिटिश अधिकारी मंदिर के रखरखाव को लेकर चिंतित थे और इस पर पूरा ध्यान देते थे.

कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को 7 मई तक का समय दिया

वहीं मुस्लिम पक्ष की तरफ से एक बार फिर आपत्ति जताई गई कि एएसआई के सर्वे की वीडियो ग्राफी अभी तक नहीं दिखाई गई है. जिसके बाद कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से कहा कि अगर वे चाहें तो कोर्ट चैंबर में आईटी विभाग की मदद सर्वे से जुड़ी वीडियो फाइल देख सकत हैं. साथ ही अगर सर्वे से उन्हें कोई आपत्ति है तो उसे बता सकते हैं. हालांकि कोर्ट ने आपत्ति दर्ज करवाने के लिए 7 मई तक का समय दिया है.

बता दें धार भोजशाला को लेकर जैन पक्ष की तरफ से भी एक याचिका दी गई है. याचिका में बताया गया है कि भोजशाला जैन मंदिर है. हालांकि कोर्ट ने एएसआई की दलील पूरी होने के बाद याचिका पर सुनवाई के लिए कहा है.

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