Mandla: स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर के हाईकोर्ट की फटकार, प्रसूति वार्ड में फर्श पर लेट रहीं महिलाएं, नोटिस जारी
मंडला जिसा चिकित्सालय
Mandla/आरके बघेल: मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल मंडला जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर माननीय उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है. जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली पड़े पदों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्रशासन को फटकार लगाई है. दरअसल जिले के आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष पंकज सोनी ने मंडला जिला अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है.
डॉक्टरों की भारी कमी
याचिका में आदिवासी बाहुल्य जिले में इलाज की गंभीर बदइंतजामी, डॉक्टरों की भारी कमी और प्रसूति वार्ड की दयनीय स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए हैं. इस मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और मंडला सीएमएचओ को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई जून में होगी.
अधिकांश लोग जिला अस्पताल पर निर्भर
याचिकाकर्ता पंकज कुमार सोनी ने हाईकोर्ट को बताया कि मंडला जिले की आबादी करीब 10 लाख है. जिसमें लगभग 70 प्रतिशत आदिवासी समुदाय से हैं. आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अधिकांश लोग जिला अस्पताल पर ही निर्भर हैं. लेकिन वहां मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव है. जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोलॉजिस्ट और न्यूरोलॉजिस्ट जैसे महत्वपूर्ण विशेषज्ञों के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं.
पिछले डेढ़ साल से कर रहे है मांग
उन्होंने कहां की पिछले डेढ़ साल से वे आंदोलन और ज्ञापनों के माध्यम से इन पदों को भरने की मांग कर रहे थे. लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. प्रशासनिक उदासीनता से तंग आकर, 7 फरवरी 2024 को हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई. हाल ही में हुई चौथी सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है. उच्च न्यायालय ने इसे जनहित का गंभीर मुद्दा मानते हुए प्रशासन को नोटिस जारी किया है, और प्रशासन को 4 हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने और रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है.
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