पुरुष भी हो रहे हैं शोषण के शिकार’, केतन केस के बीच राष्ट्रीय पुरुष आयोग बनाने की मांग

Ketan Agarwal Pune Case: केतन अग्रवाल हत्‍याकांड के बाद अब एक बार फ‍िर पुरुष आयोग की मांग उठने लगी है. इस बार यह मांग राज्‍यसभा सांसद अशोक मित्तल ने उठाई है.
अशोक मित्तल

अशोक मित्तल

Ketan Agarwal Pune Case: राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल ने पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड का हवाला देते हुए एक बार फिर राष्ट्रीय पुरुष आयोग (नेशनल कमीशन फॉर मेन) बनाने की मांग उठाई है. उनका कहना है कि यह मामला दिखाता है कि पुरुष भी अपराध के शिकार हो सकते हैं, इसलिए उन्हें भी कानूनी सुरक्षा और अपनी शिकायत रखने के लिए एक संस्थागत व्यवस्था मिलनी चाहिए.

अशोक मित्तल ने सोशल मीडिया पर कहा कि केतन अग्रवाल और उनके परिवार को निष्पक्ष जांच और न्याय मिलना चाहिए. उन्होंने याद दिलाया कि दिसंबर 2025 में उन्होंने राज्यसभा में नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल एक निजी सदस्य विधेयक (प्राइवेट मेंबर बिल) के रूप में पेश किया था.

आगे कहा कि इस बिल का उद्देश्य पुरुषों के अधिकारों की रक्षा, उनकी शिकायतों की सुनवाई और उनसे जुड़े मामलों पर काम करने के लिए एक वैधानिक आयोग बनाना है. उनके इस बयान के बाद एक बार फिर पुरुष आयोग की मांग छ‍िड़ गई है.

क्‍या काम करेगा पुरुष आयोग

प्रस्तावित बिल के अनुसार आयोग पुरुषों के अधिकारों के हनन से जुड़े मामलों की जांच करेगा. इसके अलावा पुरुषों में बढ़ती आत्महत्या, मानसिक स्वास्थ्य, घरेलू हिंसा, बेरोजगारी, बच्चों की अभिरक्षा (कस्टडी) जैसे मुद्दों पर अध्ययन और सुझाव भी देगा. आयोग जरूरतमंद पुरुषों को कानूनी सहायता, काउंसलिंग और पुनर्वास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम करेगा.

बिल में यह भी स्पष्ट किया गया है कि महिलाओं को पहले से मिले कानूनी अधिकार और सुरक्षा पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. आयोग किसी ऐसे मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा जिसमें महिला शिकायतकर्ता हो, जब तक कि सक्षम अदालत उस शिकायत को झूठा या दुर्भावनापूर्ण घोषित न कर दे.

क्‍यों सांसद ने उठाई मांग

दरअसल, पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित साथी चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया गया है. इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में पुरुषों की सुरक्षा तथा उनके अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है. इसी बीच अशोक मित्तल ने राष्ट्रीय पुरुष आयोग की मांग दोहराते हुए कहा कि न्याय और कानूनी संरक्षण हर नागरिक को समान रूप से मिलना चाहिए, चाहे वह महिला हो या पुरुष हो.

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