20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र, NEET पेपर लीक से लेकर राम मंदिर चढ़ावा चोरी समेत कई मुद्दों पर हंगामे के आसार
सांकेतिक तस्वीर.
Parliament Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र इस बार 20 जुलाई से शुरू होगा. इसको लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी है. 20 जुलाई से शुरू होने वाला मानसून सत्र 18 अगस्त तक चलेगा. केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने इसको लेकर खुद जानकारी दी है. मानसून सत्र में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है.
‘राष्ट्रहित के मुद्दों पर होगी चर्चा’
केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर ट्वीट करके मानसून सत्र को लेकर जानकारी दी है. उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘ भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों में 2026 के मानसून सत्रों को लेकर मंजूरी दे दी है. ये सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा. इस दौरान कई सार्थक चर्चा होगी. साथ ही राष्ट्रहित के लिए कई अहम फैसले लिए जाएंगे.’
On the recommendation of the Govt of India, Hon’ble President, Smt. Droupadi Murmu ji has approved the summoning of both the Houses of Parliament for the Monsoon Session 2026.
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) July 4, 2026
The Session will commence on 20 July, 2026 and continue till 13 August, 2026 for meaningful debate,… pic.twitter.com/TaEYH4F1cK
मानसून सत्र में कई मुद्दों पर विपक्ष कर सकता है हंगामा
संसदीय परंपरा के मुताबिक दोनों सदनों के संयुक्त सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ होगी. इसके साथ ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा करवाई जाएगी. वहीं सत्र से पहले विपक्ष भी तैयारियों में जुट गया है. इस बार कई अहम मुद्दे हैं, जिन पर विपक्ष हंगामा कर सकता है. इसमें नीट परीक्षा पेपर लीक मामला, अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी जैसे मुद्दे अहम हैं. नीट पेपर लीक होने के बाद से ही विपक्ष लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है. इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस में दो फाड़ का मुद्दा भी सदन में गूंजने की संभावना है.
परिसीमन बिल दोबारा पास करवाने की हो सकती है कोशिश
पिछले सत्र में कई अहम विधेयक पास हुए थे, हालांकि परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण बिल पर सरकार को सफलता नहीं मिली थी. मानसून सत्र से पहले भाजपा को पश्चिम बंगाल में प्रचंड बहुमत मिली है. जिसके बाद टीएमसी में दो फाड़ होता दिख रहा है. कई बागी विधायक और सांसद भाजपा के पाले में जा सकते हैं. साथ ही शिवसेना(UBT) में भी बगावत के सुर के कारण भाजपा को फायदा मिल सकता है, जिससे लोकसभा में सरकार को समर्थन देने वाले सांसदों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा सकती है. ऐसे में सरकार एक बार फिर परिसीमन बिल सदन में पेश कर पास करवाने की कोशिश कर सकती है.
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