फिल्‍म ‘दंगल’ से प्रभावित हुए जगदीश पटेल, बेट‍ियों की वॉलीबॉल प्रैक्टिस के लिए गौशाला को बना दिया मैदान

MP News: नागचून गांव के किसान जगदीश पटेल की पहल ने उनकी बेटियों को नेशनल और स्टेट प्लेयर बना दिया. बेटियां वॉलीबॉल खेलने के लिए रोज 5 किलोमीटर साइकिल चलाकर शहर जाती थीं.
Converted the cowshed into a playground for the daughters.

बेटियों के लिए गौशाला को बना दिया मैदान

रिपोर्ट- शेख शकील

MP News: खंडवा जिले के नागचून गांव में रहने वाले किसान जगदीश पटेल ने अपनी बेटियों के लिए वॉलीबॉल का मैदान तैयार किया है. जगदीश पटेल को चिंता सताती थी कि जब उनकी बेटियां बाहर प्रैक्टिस करने जाती हैं और समय पर नहीं लौटतीं, तो उन्हें इस बात की चिंता हमेशा बनी रहती थी. इसी चिंता को दूर करने के लिए उन्होंने फिल्म ‘दंगल’ के आमिर खान की तरह अपनी बेटियों के लिए घर की गौशाला को ही वॉलीबॉल का मैदान बना दिया.

5 किलोमीटर साइकिल चलाकर जाती थीं बेटियां

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के नागचून गांव के किसान जगदीश पटेल की पहल ने उनकी बेटियों को नेशनल और स्टेट प्लेयर बना दिया. बेटियां वॉलीबॉल खेलने के लिए रोज 5 किलोमीटर साइकिल चलाकर शहर जाती थीं. इसलिए किसान पिता ने घर के पिछले हिस्से में मौजूद बाड़े यानी गौशाला को ही वॉलीबॉल का मैदान बना डाला.

घरेलू मैदान पर पसीना बहाकर बनीं खिलाड़ी

इसी अनूठे मैदान में पसीना बहाकर बड़ी बेटी श्रद्धा नेशनल प्लेयर और छोटी बेटी ऋषिका स्टेट प्लेयर बन गईं. पिता जगदीश पटेल कहते हैं कि मेरी बेटियां देश और अपने गांव-परिवार का नाम रोशन करना चाहती हैं. मैं चाहता हूं कि वे स्पोर्ट्स एकेडमी तक जाएं. श्रद्धा और ऋषिका खुद भी अभ्यास करती हैं और गांव के अन्य बच्चों और युवाओं को भी इसी मैदान पर वॉलीबॉल के गुर सिखा रही हैं. अब तो पूरे गांव को वॉलीबॉल का नशा चढ़ गया है.

रोजाना 5 किलोमीटर की मशक्कत बनी प्रेरणा

11वीं में पढ़ने वाली श्रद्धा बताती हैं कि वे सातवीं क्लास से वॉलीबॉल खेल रही हैं. उन्होंने अपना पहला नेशनल मुकाबला 9वीं क्लास में खेला था, जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश की टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए उत्तर प्रदेश के रायबरेली में मुकाबला खेला था.

स्टेट खेल चुकीं ऋषिका, खेल में ही बनाएंगी करिअर

श्रद्धा की छोटी बहन ऋषिका 9वीं में हैं. ऋषिका ने स्टेट लेवल तक वॉलीबॉल खेला है. वे कहती हैं कि परिवार का पूरा सपोर्ट है. मैंने इसी घरेलू मैदान से वॉलीबॉल खेलने की शुरुआत की. अब इसी में अपना करिअर भी बनाऊंगी.

गांव के बच्चों को भी सिखा रहीं वॉलीबॉल

श्रद्धा और ऋषिका की इस पहल से गांव के दूसरे बच्चे और युवा भी वॉलीबॉल की ओर आकर्षित हो रहे हैं. दोनों बहनें खुद अभ्यास करने के साथ गांव के बच्चों और युवाओं को भी इसी मैदान पर वॉलीबॉल के गुर सिखा रही हैं. नागचून गांव के सरपंच शौरभ चौरे भी इस पहल को गांव के लिए प्रेरणादायक बताते हैं.

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