MP में एसआईआर पर सियासी संग्राम, भाजपा का ‘भीड़ तंत्र हटाओ’ अभियान, कांग्रेस की ‘गांव-गांव चौपाल’

MP News: मध्य प्रदेश में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन और विरोध के बीच अब दोनों दल जनता के बीच अपनी बात पहुंचाने के लिए मैदान में उतरने जा रहे हैं.
Political uproar over SIR in MP

एमपी में एसआईआर पर सियासी बवाल

MP News: मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन और विरोध के बीच अब दोनों दल जनता के बीच अपनी बात पहुंचाने के लिए मैदान में उतरने जा रहे हैं. भाजपा 24 अक्टूबर से ‘लोकतंत्र बचाओ भीड़ तंत्र हटाओ’ अभियान शुरू करेगी.

वहीं, कांग्रेस 25 अक्टूबर से ‘गांव-गांव चौपाल’ कार्यक्रम के जरिए मतदाताओं से सीधा संवाद करेगी. दोनों दलों ने अपने-अपने अभियान के लिए रणनीति तैयार कर ली है. भाजपा का अभियान दीपावली तक चलेगा, जबकि कांग्रेस पूरे महीने गांवों और बूथों तक पहुंचने की तैयारी में है.

अभियान में शामिल होंगे विधायक, सांसद और मंत्री

भाजपा एसआईआर को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने और मतदाता सूची पुनरीक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाएगी. पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी बृज गोपाल लोया के अनुसार, 24 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस अभियान में विधायक, मंत्री, सांसद और पार्टी पदाधिकारी शामिल होंगे. स्कूल-कॉलेजों में चर्चा, नुक्कड़ सभाएं और जनसंपर्क के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.

भाजपा की रणनीति एसआईआर के मुद्दे पर जनता के बीच पहुंचकर अपनी बात रखने की है. पार्टी कार्यकर्ताओं को अभियान के दौरान लोगों से संवाद करने और मतदाता सूची से जुड़े विषयों पर जानकारी देने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. भाजपा इस अभियान को दीपावली तक चलाने की तैयारी में है. पार्टी का जोर शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने पर रहेगा.

कांग्रेस 25 अक्टूबर से शुरू करेगी गांव-गांव चौपाल

भाजपा के अभियान के अगले दिन यानी 25 अक्टूबर से कांग्रेस भी मैदान में उतरेगी. कांग्रेस ने मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर गांव-गांव चौपाल लगाने की योजना बनाई है. इसके जरिए पार्टी बूथ स्तर तक मतदाताओं से संपर्क करेगी और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर अपनी बात रखेगी.

कांग्रेस की योजना गांवों में चौपाल के साथ स्थानीय स्तर पर संवाद और बैठकें आयोजित करने की है. इन कार्यक्रमों में मतदाता सूची में नाम की जांच, नाम जोड़ने की प्रक्रिया और सूची से जुड़ी शिकायतों जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी. पार्टी कार्यकर्ताओं को लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने और मतदाता सूची से संबंधित मामलों को सामने लाने के निर्देश दिए गए हैं.

कांग्रेस का अभियान 25 अक्टूबर से शुरू होकर पूरे महीने चलाने की तैयारी है. पार्टी का लक्ष्य गांवों और बूथों तक संगठन की पहुंच बढ़ाना तथा मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर लोगों को जागरूक करना है.

चौपाल और जनसंपर्क के जरिए आमने-सामने होंगे दोनों दल

एसआईआर को लेकर भाजपा और कांग्रेस की रणनीतियों में अंतर साफ दिखाई दे रहा है. भाजपा स्कूल-कॉलेजों में चर्चा, नुक्कड़ सभाओं और व्यापक जनसंपर्क के माध्यम से अपनी बात रखने की तैयारी कर रही है. वहीं, कांग्रेस गांव-गांव चौपाल के जरिए स्थानीय मतदाताओं से संवाद बढ़ाना चाहती है.

दोनों दलों ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में मतदाता सूची का पुनरीक्षण राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है. भाजपा जहां विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की तैयारी में है, वहीं कांग्रेस एसआईआर से जुड़े सवालों को गांव और बूथ स्तर तक ले जाने की रणनीति पर काम कर रही है.

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