ऐसे कैसे मिलेगा न्याय… MP में 21 लाख केस पेंडिंग, 100 से ज्यादा जज दफ्तरी काम में व्यस्त

मध्य प्रदेश की अदालतों में लंबित मुकदमों और जजों की कमी को लेकर हाल ही में सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स कई सवाल खड़े करती हैं.
MP High Court

फाइल फोटो

मध्य प्रदेश की अदालतों में लंबित मुकदमों और जजों की कमी को लेकर हाल ही में सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स कई सवाल खड़े करती हैं. इन रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य प्रदेश (MP) की जिला और अधीनस्थ अदालतों में इस समय 21.42 लाख से अधिक केस पेंडिंग हैं, जिनमें से लगभग 36,000 मामले पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से फैसले के इंतजार में लटके हुए हैं.

100 से अधिक न्यायाधीश दफ्तरी काम में व्यस्त

इतना ही नहीं ये रिपोर्ट्स ये भी बताती हैं कि प्रदेश के करीब 1500 न्यायाधीशों में से 100 से अधिक न्यायाधीश अदालतों में सुनवाई करने के बजाय प्रितनियुक्ति पर दफ्तरी और प्रशासनिक काम कर रहे हैं. वहीं जिला एवं सत्र न्यायालयों में चल रहे मुकदमें जल्दी खत्म हो सके इसलिए सरकार की तरफ से दो आयोग बनाए गए थे.

शेट्टी और रेड्डी आयोग

शेट्टी और रेड्डी आयोग ने अपने रिपोर्ट में उनके लिए अधिक सुविधाएं, छुट्टियां और भत्ते देने के सुझाव दिए थे. इसी सुझाव के आधार पर न्यायधीशों के बेहतर कामकाज के लिए 16 तरह के भत्ते और सुविधाएं दी जा रही है. लेकिन प्रतिनियुक्ति पर गए इन न्यायाधीशों से उनके मूल काम यानी मुकदमों की सुनवाई नहीं हो रही.

प्रिसिपल बेंच में 22 निचली कोर्ट के न्यायाधीश अटैच

दैनिक भास्कर के मुताबिक, गौरतलब है कि हाईकोर्ट की प्रिसिपल बेंच में ही 22 निचली कोर्ट के न्यायाधीश अटैच हैं. इनके द्वारा प्रशासनिक और दफ्तरी काम किया जा रहा है. इसी तरह इंदौर, ग्वालियर खंडपीठ में भी 3-3 जज प्रतिनियुक्ति पर हैं. लोकायुक्त संगठन में भी 5 न्यायधीशों को भेज रखा है. लोकायुक्तक के विधिक सलाहकार सहित, अन्य काम ये देख रहे हैं. रेरा, उपभोक्ता फोरम में रिजिस्ट्रार की जिम्मेदारी भी एडीजे लेवल के जज के पदस्थ है.

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