अब स्क्रीन पर होगा एनकाउंटर का अभ्यास, बिना गोली खर्च किए हथियार चलाना सीखेंगे MP पुलिस के जवान
पुलिस ट्रेनिंग (फाइल फोटो)
MP News: मध्य प्रदेश में अब पुलिस के जवानों को हथियार चलाने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए वास्तविक गोलियां खर्च करने की जरूरत नहीं होगी. पुलिसकर्मी वर्चुअल तकनीक के जरिए फायरिंग से लेकर सक्रिय हमलावर का मुकाबला करने, इमारतों की तलाशी लेने और भीड़ नियंत्रित करने तक का अभ्यास कर सकेंगे.
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए कॉम्बैट वेपन सिम्युलेटर और स्मॉल आर्म्स वेपन ट्रेनिंग सिम्युलेटर खरीदने का फैसला किया है. सिम्युलेटर के जरिए पुलिसकर्मियों को वास्तविक परिस्थितियों जैसा प्रशिक्षण देने की तैयारी है.
पुलिस प्रशिक्षण के लिए प्रस्तावित सिम्युलेटर में कई तरह के हथियारों के इस्तेमाल का अभ्यास कराया जाएगा. इसमें इंसास, एसएलआर, एके-47, लाइट मशीन गन (एलएमजी), कार्बाइन, स्नाइपर राइफल और पिस्टल शामिल हैं. जवान वर्चुअल वातावरण में फायरिंग का अभ्यास कर सकेंगे. खास बात यह है कि एक साथ कई पुलिसकर्मी स्क्वाड स्तर के प्रशिक्षण में भी शामिल हो सकेंगे. इससे व्यक्तिगत कौशल के साथ टीम के रूप में कार्रवाई करने की क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी.
स्क्रीन पर बनेंगे चुनौतीपूर्ण हालात, जवान करेंगे मुकाबला
सिम्युलेटर में 3D स्क्रीन की मदद युद्ध के सीन को तैयार किया जाएगा. इसमें सक्रिय हमलावर से निपटने, बंधक जैसी परिस्थितियों, इमारतों में प्रवेश कर तलाशी लेने और उन्हें सुरक्षित करने तथा भीड़ नियंत्रण जैसे परिदृश्य शामिल होंगे. इन परिस्थितियों में पुलिसकर्मियों को तेजी से निर्णय लेने, सही रणनीति अपनाने और समन्वय के साथ कार्रवाई करने का अभ्यास कराया जा सकेगा. इसका उद्देश्य जवानों को आपात स्थितियों में अधिक प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने के लिए तैयार करना है.
सागर और रीवा में होगी स्थापना
पुलिस मुख्यालय की योजना के अनुसार, सागर और रीवा की पुलिस प्रशिक्षण शालाओं में सिम्युलेटर स्थापित किए जाएंगे. अधिकारियों के मुताबिक, जवाहरलाल नेहरू पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में 500 से अधिक पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था है. वहीं, रीवा में भी करीब 500 जवानों को प्रशिक्षण देने की क्षमता है.
भर्ती बढ़ने के साथ हाईटेक ट्रेनिंग पर जोर
आगामी महीनों में अतिरिक्त पुलिस भर्ती के बाद प्रशिक्षण लेने वाले जवानों की संख्या बढ़ने की संभावना है. ऐसे में सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे वास्तविक गोला-बारूद की खपत कम होगी और जवानों को बार-बार अभ्यास करने का अवसर मिलेगा. नियंत्रित वातावरण में हथियार संचालन और अलग-अलग परिस्थितियों से निपटने का अभ्यास पुलिस बल की तैयारी को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
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