कभी खाद के लिए होता था संग्राम… अब टोकन व्‍यवस्‍था से मिल रहा समाधान! किसान बोले’ खाद वितरण में पहले जैसी परेशानी नहीं

MP News: खाद के लिए सुबह से लंबी कतारें, शाम होते ही केंद्रों के बाहर भीड़ और कई बार हालात चक्काजाम तक पहुंच जाते थे. लेकिन अब टोकन व्यवस्था के जरिए खाद वितरण को व्यवस्थित करने की कोशिश का असर दिखाई देने लगा है.
The Collector took stock of the situation.

कलेक्टर ने लिया जायजा

MP News: कभी खाद के लिए चक्काजाम करते थे, कभी रातभर लंबी कतारों में इंतजार करते थे. लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है. ऐसा कहना है टीकमगढ़ के किसानों का जिन्‍हें सरकार की टोकन व्यवस्था से राहत मिल रही है. उनका कहना है कि खाद वितरण केंद्रों पर व्यवस्थाओं में सुधार हुआ है.

दरअसल, टीकमगढ़ जिले में खाद को लेकर बीते दिनों जो तस्वीर सामने आती थी, उसमें किसानों की परेशानी साफ दिखाई देती थी. खाद के लिए सुबह से लंबी कतारें, शाम होते ही केंद्रों के बाहर भीड़ और कई बार हालात चक्काजाम तक पहुंच जाते थे. लेकिन अब टोकन व्यवस्था के जरिए खाद वितरण को व्यवस्थित करने की कोशिश का असर दिखाई देने लगा है.

टोकन व्‍यवस्‍था की हकीकत जानने पहुंचे कलेक्टर

टोकन व्यवस्था की हकीकत जानने कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय बड़ौराघाट और खरगापुर स्थित खाद वितरण केंद्रों पर पहुंचे. यहां उन्होंने खाद वितरण की पूरी प्रक्रिया को बारीकी से देखा. किसानों से सीधे संवाद कर टोकन जारी होने से लेकर खाद प्राप्त होने तक की जानकारी ली.

कलेक्टर ने केंद्रों पर किसानों के लिए धूप से बचाव, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं का भी जायजा लिया. साथ ही अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी किसान को खाद के लिए अनावश्यक परेशान न होना पड़े और वितरण व्यवस्था पूरी पारदर्शिता एवं सुव्यवस्थित तरीके से संचालित हो.

किसानों ने टोकन व्‍यवस्‍था की तारीफ की

खास बात यह रही कि इस बार किसानों की जुबां पर शिकायतों के बजाय व्यवस्था की तारीफ सुनाई दी. किसानों का कहना है कि पहले खाद के लिए कई-कई दिनों तक कतारों में खड़ा रहना पड़ता था. शाम से ही लाइन लग जाती थी, लेकिन टोकन व्यवस्था लागू होने के बाद काफी आसानी हुई है. अब पहले की अपेक्षा समय की बचत हो रही है और खाद प्राप्त करने की प्रक्रिया भी आसान हुई है.

सामने आने वाली तस्‍वीर राहत भरी

फिलहाल बड़ौराघाट और खरगापुर से सामने आ रही यह तस्वीर प्रशासन के लिए राहत भरी है. हालांकि असली चुनौती यही है कि खाद की मांग के बीच यह व्यवस्था लगातार बनी रहे और हर किसान को समय पर खाद मिल सके. कुल मिलाकर सवाल सिर्फ खाद उपलब्ध कराने का नहीं, बल्कि किसानों को सम्मान के साथ बिना परेशानी खाद उपलब्ध कराने का है. और टोकन व्यवस्था इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम बनती दिखाई दे रही है.

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