‘हम ब्राह्मण हैं, तुम नीची जाति के हो’, दमोह CMO पर जातिगत टिप्पणी, दुर्गा प्रतिमा विसर्जन को लेकर विवाद
दमोह: विवाद के बाद लोगों ने अधिकारी को घेरा
Damoh News: एक तरफ मध्य प्रदेश सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने, समानता और सामाजिक समावेश को बढ़ावा देने की बात कर रही है तो दूसरी तरफ दमोह में एक सरकारी अधिकारी को कथित तौर पर उसकी जाति के आधार पर अपमानित किए जाने का मामला सामने आया है. सवाल सिर्फ एक अधिकारी के सम्मान का नहीं है बल्कि सवाल उस व्यवस्था का भी है, जहां संविधान की शपथ लेकर सरकारी सेवाओं में पहुंचे लोगों को क्या आज भी जाति के तराजू पर तौला जाएगा.
क्या है पूरा मामला?
फुटेरा तालाब पर मंगलवार की देर शाम देवी प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला जारी था. प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की थी. इसके लिए प्रशासन ने एक स्थान निर्धारित किया था. तालाब के आसपास बैरिकेडिंग की गई थी ताकि लोग अनावश्यक रूप से पानी में ना उतरे. सुरक्षा के लिहाज से लाइफ जैकेट, रेस्क्यू फ्लोट और अन्य जरूरी इंतजाम भी किए गए थे. बताया जा रहा है कि निर्धारित स्थान पर कई समितियां पहले ही प्रतिमाओं का विसर्जन कर चुकी थीं. इसी दौरान कुछ लोगों ने बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश की मौके पर ड्यूटी कर रहे सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई.
देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि करीब दो घंटे तक नोकझोंक चलती रही. समिति के कुछ सदस्यों ने सीएमओ पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और उनसे माफी मांगने की बात पर अड़ गये और CMO मुर्दाबाद के नारे लगाते हुये धरने पर बैठ गये लेकिन इस विवाद ने उस वक्त नया मोड़ ले लिया, जब आरोप है कि एक महिला ने सीएमओ की जाति को लेकर टिप्पणी कर दी.
राजेंद्र सिंह लोधी ने लगाए आरोप
आरोप है कि धरने के दौरान एक महिला ने सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी से कहा “हम ब्राह्मण हैं, तुम नीची जाति के हो, माफी मांग लोगे तो क्या चला जाएगा?” हालांकि, इस कथित टिप्पणी की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है. इस पूरे घटनाक्रम में सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी ने माफी मांगने से इनकार कर दिया. उनका पक्ष था कि उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया, जो सिविल सेवा आचरण के खिलाफ हो. पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ और समिति के सदस्यों ने देवी प्रतिमा का विसर्जन किया.
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ओबीसी महासभा के सदस्य ने उठाया मुद्दा
ओबीसी महासभा के सदस्य वैभव सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट में इस घटना को जातिगत अपमान के आरोपों से जोड़कर उठाया गया. पोस्ट में भाजपा से जुड़े पंडित सतीश तिवारी का भी जिक्र करते हुए उन्हें मध्यस्थता करते हुए बताया गया है. इसके बाद सोशल मीडिया पर ओबीसी समुदाय के लोगों और अन्य वर्गों के बीच तीखी बहस शुरू होने की बात सामने आई है. अब यह मामला केवल नगर पालिका की विसर्जन व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है.इसमें जातिगत सम्मान, प्रशासनिक अधिकार और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दे भी जुड़ गए
हैं.