अंगारों पर चलकर होता है दूल्हा-दुल्हन का गृह प्रवेश, छत्तीसगढ़ के इस जिले में निभाई जाती है अनोखी परंपरा, जानें क्या है मान्यता
रायगढ़ में अनोखी परंपरा
CG News: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक अनोखी और हैरान करने वाली परंपरा सामने आई है, जहां दूल्हा-दुल्हन ने जलते अंगारों पर चलकर अपने नए जीवन की शुरुआत की. यह परंपरा गंधेल गोत्र के परिवारों में लंबे समय से चली आ रही है. मामला भूपदेवपुर थाना क्षेत्र के बिलासपुर गांव का है, जहां 27 अप्रैल को विवाह समारोह के दौरान इस विशेष रस्म को निभाया गया.
गृह प्रवेश तक नहीं पीते पानी
परिवार के लोगों के अनुसार, दुल्हन के गृह प्रवेश तक पूरे घर में कोई भी पानी तक नहीं पीता. दूल्हे की मां ने बताया कि यह परंपरा वर्षों पुरानी है और इसे पूरी आस्था के साथ निभाया जाता है. ग्रामीणों का मानना है कि यह किसी तरह की अग्नि परीक्षा होती है, जिसमें यह देखा जाता है कि दुल्हन अपने मायके से कोई नकारात्मक प्रभाव लेकर तो नहीं आई है.
शादी और विदाई की प्रक्रिया
जानकारी के मुताबिक, बिलासपुर गांव के जयप्रकाश राठिया की शादी बाड़ादरहा गांव की पुष्पा राठिया से हुई. 26 अप्रैल को बारात लड़की के गांव पहुंची और अगले दिन दुल्हन की विदाई के बाद जब वह ससुराल पहुंची, तो पहले पारंपरिक तरीके से उसका स्वागत किया गया. इसके बाद उसे नए कपड़े और आभूषण दिए गए. दूल्हे के पिता मेहत्तर राठिया ने बताया कि दुल्हन के घर आने तक पूरा परिवार उपवास रखता है. इस दौरान न तो कोई भोजन करता है और न ही पानी पीता है. यह व्रत दुल्हन के गृह प्रवेश के साथ ही समाप्त होता है.
अंगारों पर चलने की रस्म
रस्म के दौरान सबसे पहले मंडप की पूजा की गई. मंडप को चारों ओर से कपड़ों से ढक दिया गया. गांव के बैगा पर देवता आने की मान्यता है, और उसी अवस्था में उन्होंने चूल्हे से जलते अंगार निकालकर मंडप के बीच बिछा दिए. इसके बाद बैगा खुद उन अंगारों पर नृत्य करने लगे. इसके तुरंत बाद दूल्हा और दुल्हन ने हाथ पकड़कर उन्हीं अंगारों पर सात फेरे लिए. आश्चर्य की बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी को कोई चोट नहीं आई. स्थानीय लोगों के अनुसार, इस रस्म के दौरान दो बकरों की बलि भी दी जाती है.
परंपरा के पीछे की मान्यता
राठिया परिवार की मान्यता है कि आग पर चलना केवल परंपरा नहीं, बल्कि पवित्रता और विश्वास का प्रतीक है. उनका मानना है कि जो दंपति इस अग्नि परीक्षा को पार कर लेता है, वह जीवन की हर कठिनाई का सामना साथ मिलकर करने की ताकत हासिल करता है. इसके साथ ही एक और धार्मिक परंपरा का पालन करना भी जरूरी माना जाता है. गांव के प्राचीन शिव मंदिर में बारात के जाने और लौटने के समय पूजा की जाती है. इस शादी में भी दूल्हा पक्ष ने मंदिर पहुंचकर नारियल चढ़ाया और भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर विवाह की अंतिम रस्में पूरी कीं.
ये भी पढे़ं- CG News: राज्यसभा सांसद संदीप पाठक के पैतृक गांव में घर की दीवार पर लिखा ‘गद्दार’, AAP कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन