मंजरी के किरदार ने मुझे खुद को नए सिरे से पहचानने का मौका दिया : शिवानी एम. सिंह

मुंबई. कई बार जिंदगी में कोई नया व्यक्ति बदलाव की वजह बनने के बजाय हमें खुद के उस रूप से मिलवाता है, जिसे हम जिम्मेदारियों के बीच कहीं भूल चुके होते हैं.
मंजरी के किरदार ने मुझे खुद को नए सिरे से पहचानने का मौका दिया : शिवानी एम. सिंह

मुंबई. कई बार जिंदगी में कोई नया व्यक्ति बदलाव की वजह बनने के बजाय हमें खुद के उस रूप से मिलवाता है, जिसे हम जिम्मेदारियों के बीच कहीं भूल चुके होते हैं. शेमारूमी की रिलेशनशिप ड्रामा सीरीज ‘दिल पड़ोसी’ में मंजरी का किरदार निभा रहीं अभिनेत्री शिवानी एम. सिंह ने भी कुछ इसी सोच को पर्दे पर उतारा है. उन्होंने अपने किरदार और उसकी भावनात्मक यात्रा को लेकर अनुभव साझा किए.

सीरीज में मंजरी एक गृहिणी है, जिसकी शादीशुदा जिंदगी बाहर से सामान्य नजर आती है, लेकिन पति मोहक के साथ उसके रिश्ते में भावनात्मक और शारीरिक दूरी है. घर और परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए वह अपनी इच्छाओं और खुशियों को पीछे छोड़ चुकी है. उसकी जिंदगी में बदलाव तब शुरू होता है, जब खुले विचारों वाले दीया और रोनक उसके पड़ोसी बनकर आते हैं. रोनक का अपनापन और उसकी बातों को ध्यान से सुनने का अंदाज मंजरी को लंबे समय बाद खास होने का एहसास कराता है.

शिवानी एम. सिंह का कहना है कि मंजरी की कहानी किसी नए व्यक्ति के आने से बदलने की नहीं, बल्कि खुद को दोबारा समझने की यात्रा है. रोनक का व्यवहार उसके भीतर दबे सवालों और भावनाओं को सामने लाने का माध्यम बनता है.

अपने किरदार के बारे में शिवानी कहती हैं, “कभी-कभी कोई नया इंसान हमें बदलता नहीं, बल्कि हमारे अंदर छिपे उस रूप से मिलवाता है, जिसे हम खुद भी भूल चुके होते हैं. मंजरी ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा घर और शादी को संभालने में लगा दिया. इस दौरान वह खुद से यह पूछना भूल गई कि उसे क्या चाहिए और किस चीज से खुशी मिलती है. जब कोई उसे एहसास कराता है कि उसकी भावनाएं और मौजूदगी भी मायने रखती हैं, तो उसके मन में दबे सवाल फिर सामने आने लगते हैं.”

अभिनेत्री के मुताबिक, मंजरी का किरदार उन महिलाओं की भावनाओं को सामने लाता है, जो परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपनी पहचान और इच्छाओं को नजरअंदाज कर देती हैं. उन्होंने बताया कि वह मंजरी को अचानक पूरी तरह बदल जाने वाली महिला के रूप में नहीं देखतीं. उसके भीतर हमेशा से प्यार, अपनापन और अपनी अलग पहचान पाने की इच्छा मौजूद थी. बदलाव सिर्फ इतना है कि अब वह अपनी भावनाओं को समझने और स्वीकार करने लगी है.

शिवानी ने कहा कि इस किरदार को निभाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा, क्योंकि मंजरी का वास्तविक बदलाव उसके मन के भीतर हो रहा है. उसे अभिनय के माध्यम से पर्दे पर उतारना आसान नहीं था. उनका मानना है कि मंजरी के फैसलों को केवल सही या गलत के नजरिए से नहीं देखना चाहिए, बल्कि उसके पीछे छिपे अकेलेपन, भावनाओं और अपनी पहचान तलाशने की कोशिश को भी समझना जरूरी है.

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