मिडिल ईस्ट संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, डीजल पर बढ़ाई एक्सपोर्ट ड्यूटी

Diesel Export Duty Hike: केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने पेट्रोल-डीजल और हवाई ईंधन (ATR) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है. इससे तेल कंपनियों के द्वारा निर्यात किए जा रहे तेल पर नियंत्रण मिलेगा.
Petrol-Diesel Price Today

पेट्रोल डीजल (File Image)

Diesel Export Duty Hike: मिडिल ईस्ट संकट के बीच दुनियाभर में हाहाकार मचा हुआ है. इस वजह से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. इन सबके बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने डीजल और हवाई ईंधन (ATR) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है. इससे तेल कंपनियों के द्वारा निर्यात किए जा रहे तेल पर नियंत्रण मिलेगा.

कितनी एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ी?

  • केंद्र सरकार ने डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी दोगुनी कर दी है, इसे 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.
  • हवाई ईंधन (ATF) पर निर्यात शुल्क को 29.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.
  • पेट्रोल पर किसी तरह का चार्ज नहीं बढ़ाया गया है. एक्सपोर्ट चार्ज को जीरो रखा गया है.

एक्सपोर्ट ड्यूटी को क्यों बढ़ाया गया?

  • सरकार के द्वारा डीजल और जेट फ्यूल पर निर्यात शुल्क बढ़ाने का निर्णय लिया गया है, ताकि ग्राहकों पर महंगाई की मार ना पड़े.
  • घरेलू स्तर पर डीजल-पेट्रोल और हवाई ईंधन की उपलब्धता बनी रहे.
  • ये बदलाव ऐसे वक्त में किया गया है, जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल बनी हुई है.
  • सरकार ने ये बदलाव व्यापक विंडफॉल टैक्स व्यवस्था अंतर्गत किया है.
  • रिफाइनरी कंपनियों के प्रॉफिट और लोकल मार्केट की जरूरतों में संतुलन स्थापित करने के लिए सरकार समय-समय पर निर्यात शुल्क को बढ़ाती या घटाती है.

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ऑयल कंपनियों को झटका

  • सरकार के इस कदम से तेल कंपनियों का कारोबार प्रभावित होगा.
  • उन कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा, जो दूसरे देशों में रिफाइन डीजल और हवाई ईंधन सप्लाई करती हैं.
  • पेट्रोल के एक्सपोर्ट चार्ज में बदलाव ना करने से कंपनियों पर निर्यात के दौरान असर नहीं पड़ेगा.

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