US की डेडलाइन खत्म! अब भारत कहां से खरीदेगा तेल और LPG? सप्लाई पर क्या असर पड़ेगा, कैसे होगी भरपाई?

India Russian oil imports: अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की छूट दी थी. अब यह डेडलाइन खत्म हो चुकी है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि अब भारत कहां से तेल खरीदेगा? तो आइये जानते हैं अभी भारत के पास क्‍या-क्‍या विकल्प हैं.
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अब भारत कहां से आएगा तेल?

India Russian oil imports: अमेरिका-ईरान-इजरायल में जंग शुरू होने के बाद से ही दुनियाभर में तेल और एलपीजी का संकट छा गया था. ये संकट जंग के 45 दिन के बाद भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. जंग की शुरुआत में ही अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदारी करने के लिए 30 दिनों का समय दिया था. इसके बाद से ही रूस से तेल और एलपीजी की खरीदारी जारी है. हालांकि यूएस की तरफ से दिया गया समय अब खत्म हो रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा? तो इसका जवाब है नहीं.

भारत अब अमेरिका के भरोसे नहीं है. जी हां मतलब अमेरिका ये तय नहीं करेगा कि भारत किससे तेल की खरीदारी करेगा और किससे तेल की खरीदारी नहीं करेगा. मिडिल ईस्‍ट संकट के बाद से ही भारत लगातार ऐसे छोटे देशों से तेल और एलपीजी आयात कर रहा है, जहां से पहले नहीं किया गया है. यही वजह है कि अब तक भारत में उस हिसाब से तेल का संकट पैदा नहीं हुआ है, जिस तरह का डर लोगों को था.

रूस से तेल खरीद पाएगा अमेरिका?

अमेरिका ने भले ही रूस से तेल खरीदारी की छूट को खत्म कर द‍िया है. इसके बाद भी भारत रूस से तेल खरीदारी करता रहेगा. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो भारत लगातार रूस से तेल और एलपीजी खरीदता रहेगा. अमेरिका जो भी फैसला लिया है. वह उसने अपने लिए लिया है. अमेरिका के इस फैसले से भारत का कुछ भी लेना देना नहीं है.

अंग्रेजी अखबार मिंट ने एक अधिकारी को कोट कर लिखा कि रूसी तेल पर प्रतिबंधों में छूट पर अमेरिका का फैसला उसका अपना अधिकार है और यह भारत की आयात रणनीति तय नहीं करेगा. मतलब साफ है कि जिन पर प्रतिबंध नहीं लगा है वो तेल और एलपीजी की खरीदी जारी रख सकते हैं.

कहां से भारत आएगा तेल?

सरकार ने हमेशा से कहा है कि उसका फोकस विविधीकरण पर रहा है. होर्मुज बंद होने के बाद भी भारत में लगातार तेल आ रहा है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लैटिन अमेरिका भारत के तेल सप्लायर के तौर पर जगह ले सकता है. इसके अलावा ब्राजील, कोलंबिया भी इस तरफ कदम बढ़ा सकते हैं.

पीएम मोदी ने पहले ही संकेत दिए थे कि अगर हालात ठीक नहीं रहे तो हम दूसरे विकल्पों पर काम कर सकते हैं. ऐसा माना जा रहा है कि अगर ईरान अमेरिका के बीच जल्‍द हालात ठीक नहीं होते हैं तो भारत अपने दूसरे विकल्पों पर काम कर सकता है. 

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