लोकसभा के बाद अब राज्यसभा की बारी, क्या आसानी से पास होगा एंटी पेपर लीक बिल?
पेपर लीक बिल पर बातचीत करते राहुल गांधी और जितेंद्र सिंह
Loksabha Anti Paper Leak Bill: देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले दिनों हुए छात्र आंदोलन के बाद अब सरकार भी एक्शन मोड में आ चुकी है. इसी के तहत लोकसभा में पिछले दिनों ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक पास कराया गया. अब इस बिल की बारी राज्यसभा में है. आज यानी कि 30 जुलाई दिन गुरुवार को यह बिल राज्यसभा में पेश किया जाएगा.
इस कानून का उद्देश्य देशभर में प्रतियोगी और सरकारी भर्ती परीक्षाओं में होने वाले पेपर लीक तथा अन्य गड़बड़ियों पर सख्ती से रोक लगाना है. छात्रों के लगातार विरोध और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग के बीच सरकार यह संशोधन लेकर आई है.
लोकसभा में विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली. विपक्ष ने परीक्षा घोटालों के साथ-साथ छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया. हालांकि, चर्चा के बाद सरकार ने ध्वनि मत से विधेयक को पारित करा लिया. अब इसकी अगली परीक्षा राज्यसभा में होगी.
कैसा है राज्यसभा में सरकार का संख्याबल
संख्या बल की बात करें तो राज्यसभा में सरकार की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है. उच्च सदन की कुल प्रभावी सदस्य संख्या 242 है, इसलिए किसी सामान्य विधेयक को पारित कराने के लिए 122 सदस्यों का समर्थन पर्याप्त होता है. भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास करीब 152 सांसदों का समर्थन बताया जा रहा है, जिससे सरकार को इस विधेयक के पारित होने में बड़ी मुश्किल आने की संभावना नहीं है.
वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के पास लगभग 63 सदस्य हैं, जबकि अन्य दलों के पास करीब 29 सांसद हैं. ऐसे में यदि पूरा विपक्ष भी एकजुट होकर विरोध करता है, तब भी संख्या के आधार पर सरकार को बढ़त मिलती दिखाई देती है. इसलिए राजनीतिक बहस भले ही तेज हो, लेकिन विधेयक के पारित होने की संभावना मजबूत मानी जा रही है.
नए कानून में क्या-क्या है?
प्रस्तावित कानून में परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान किया गया है. यदि कोई व्यक्ति पेपर लीक करने, परीक्षा प्रक्रिया में अनुचित साधनों का उपयोग करने या संगठित तरीके से परीक्षा में गड़बड़ी करने का दोषी पाया जाता है, तो उसे कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की जेल हो सकती है. इसके साथ ही दोषियों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का भी प्रावधान रखा गया है.
सरकार का कहना है कि नए कानून से परीक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी तथा मेहनत करने वाले छात्रों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी. अब सभी की नजरें राज्यसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां इस महत्वपूर्ण विधेयक पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.