‘ज्यादा बोलबे ता तोका बंद कइके डंडा से मारब’, जल निगम के कर्मचारियों पर भड़के BJP MLA, लगाई फटकार, Video

UP News: भाजपा विधायक रत्नाकर मिश्रा ने जल निगम के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई. कहा, 'अबहीं, तोहे बंद कइके डंडा से मारब, नहीं सुधर जा, सारे काम दुरुस्त कर ले जा, पानी सप्लाई जल्दी से जल्दी चालू करावा.'
Mirzapur MLA Ratnakar Mishra video

मिर्जापुर सदर सीट से भाजपा विधायक रत्नाकर मिश्रा ने अधिकारियों को लगाई फटकार

Mirzapur News: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर सदर सीट से भाजपा के विधायक रत्नाकर मिश्रा ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई. विधायक ने इस दौरान चेतावनी देते हुए कहा कि जनकारी समस्याओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने साफ कहा कि जगह-जगह सड़कों की खुदाई और निर्माण में हो रही अत्यधिक देरी से आम नागरिक परेशान हैं. अधिकारियों को अपनी कार्यशैली बदलनी होगी, वरना कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें. इतना ही नहीं उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए अधिकारियों से कहा कि ‘तोका बंद कइके डंडा से मारब, नहीं सुधर जा.’ विधायक के इस रवैए को लेकर मामला गरमाया हुआ है. जानें क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह मामला सड़कों की खुदाई, सीवर लाइन और जल जीवन मिशन से जुड़ा है. जिसकी सुस्त रफ्तार को लेकर विधायक ने प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई और कहा कहा कि ‘हर घर जल’ योजना और सीवर लाइन के निर्माण कार्यों ने पूरे शहर की रफ्तार रोक दी है. अधिकारी अपनी कार्यशैली में बदलाव लाएं, नहीं तो कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें.

15 दिनों का दिया अल्टीमेटम

इस दौरान अधिकारियों ने भी माना की काम में देरी और लापरवाही हुई है. अधिकारियों ने सफाई देते हुए बताया कि कुछ तकनीकी बाधाओं और सड़क निर्माण के विशेष मानकों के कारण काम में देरी हुई है. लेकिन अधिकारियों के जवाब सुनकर विधायक संतुष्ट नहीं हुए. इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर कार्य स्थल की बाधाएं दूर नहीं हुईं और काम में तेजी नहीं आई, तो वे शासन स्तर पर सख्त कदम उठाएंगे.

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स्थानीय भाषा में लगाई फटकार

इस दौरान विधायक ने स्थानीय भाषा में अधिकारियों को फटकार लगाई. उन्होंने कहा, ‘अबहीं, तोहे बंद कइके डंडा से मारब, नहीं सुधर जा, सारे काम दुरुस्त कर ले जा, पानी सप्लाई जल्दी से जल्दी चालू करावा.’ विधायक ने साफ किया कि अगर जनता पानी की समस्या से जूझेगी, तो अधिकारियों को भी परेशान होना पड़ेगा. विधायक के इस व्यवहार को लेकर यूपी कांग्रेस ने पलटवार किया और पूछा कि भाषा कि मर्यादा कहां गई?

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