बंगाल सरकार का बड़ा कदम, गाय काटने पर रोक-सार्वजनिक बूचड़खाने भी होंगे बंद, स्कूलों में राष्ट्रगीत जरूरी
सुवेंदु अधिकारी
Suvendu Adhikari Big Decisions: पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दो बड़े फैसलों का ऐलान किया है, जिससे वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राह पर चलते नजर आ रहे हैं. एक तरफ राज्य में पशु वध को लेकर सख्त नियम लागू किए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों में रोजाना ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया गया है. इन फैसलों को राज्य सरकार की नई प्रशासनिक और वैचारिक दिशा के तौर पर देखा जा रहा है.
सुवेंदु अधिकारी की राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब बिना आधिकारिक अनुमति के गाय, बैल, बछड़े और भैंस जैसे पशुओं का वध नहीं किया जा सकेगा. इसके लिए स्थानीय निकाय और सरकारी पशु चिकित्सक से संयुक्त प्रमाणपत्र लेना जरूरी होगा.
प्रमाणपत्र तभी जारी होगा जब पशु बूढ़ा हो, काम करने की स्थिति में न हो या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो. सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर भी रोक लगा दी है. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ जेल तथा जुर्माने का प्रावधान रखा गया है.
अवैध बूचड़खानों पर होगी कार्रवाई
सरकार का कहना है कि यह कदम 1950 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के लिए उठाया गया है. साथ ही अवैध बूचड़खानों, पशु तस्करी और गैरकानूनी पशु व्यापार पर भी कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस को निगरानी बढ़ाने के लिए कहा गया है.
सभी स्कूलों में बजाया जाएगा वंदे मातरम
इसी के साथ राज्य के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा में वंदे मातरम गाना अनिवार्य किया गया है. शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार, कक्षाएं शुरू होने से पहले विद्यार्थियों को रोज ‘वंदे मातरम्’ गाना होगा. सरकार का दावा है कि इसका उद्देश्य छात्रों में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय मूल्यों की भावना को मजबूत करना है.
‘वंदे मातरम्’ भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा था. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बना था.
राजनीतिक गलियारों में इन दोनों फैसलों को लेकर बहस भी शुरू हो गई है. भाजपा इसे कानून व्यवस्था और राष्ट्रवाद से जोड़ रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक संदेश देने वाला कदम बता रहा है. हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि दोनों फैसले प्रशासनिक सुधार और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से लिए गए हैं.
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