क्या है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और क्यों बनाई गई? इंटरनेट पर चला जलवा, 4 दिन में मिला 44 लाख लोगों का साथ
कॉकरोच जनता पार्टी
Cockroach Janta Party: देश के चीफ जस्टिस सूर्यकांत के बयान के बाद सोशल मीडिया पर कॉकरोच नाम तेजी से ट्रेंड कर रहा है. अब इसी नाम की एक पार्टी भी बन गई है. यानी कि कॉकरोच जनता पार्टी देखने में यह मजाकिया या मीम वाली पार्टी लगती है, लेकिन इसके पीछे नाराजगी और युवाओं का गुस्सा है, जो सिस्टम से बुरी तरह से नाराज है. इसी नाराजगी को जाहिर करने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी बनाई गई है.
दरअसल विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. सुनवाई के दौरान उन्होंने कुछ युवाओं और तथाकथित एक्टिविस्टों को लेकर कॉकरोच और पैरासाइट जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया.
बयान सामने आने के बाद ही सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया जा रहा है. यही वजह है कि खुद सीजेआई ने इसको लेकर सफाई दी है. लेकिन, इसके बाद भी मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. उनका कहना था कि टिप्पणी बेरोजगार युवाओं के लिए नहीं बल्कि फर्जी डिग्री और सिस्टम का गलत इस्तेमाल करने वालों के लिए थी.
कैसे बनी ‘Cockroach Janta Party’?
सीजेआई के बयान से मचे विवाद के बाद कुछ युवाओं ने ने मिलकर मजाकिया अंदाज में कॉकरोच जनता पार्टी नाम का ऑनलाइन पेज बनाया, इसके बाद से ही लगातार इस पेज को लोग फॉलो कर रहे हैं, चार दिन पहले बने इस पेज को अब तक 44 लाख से ज्यादा लोग फॉलो कर चुके हैं.
इस पार्टी की टैगलाइन और पोस्ट सीधे तौर पर सिस्टम, राजनीति और सत्ता पर कटाक्ष करती हैं. पार्टी बनाने वालों खुद को युवाओं की पार्टी बताया है. सोशल मीडिया पर मीम, पोस्टर, नकली घोषणापत्र और राजनीतिक व्यंग्य के जरिए यह तेजी से वायरल हो रही है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभियान के पीछे सबसे ज्यादा जिस नाम की चर्चा हुई, वह अभिजीत दीपक का है. उन्होंने ही इस पार्टी को बनाया है. वह पहले पीआर और डिजिटल कम्युनिकेशन फील्ड में काम किया करते थे. इस पार्टी की शुरुआत से उन्होंने एक बार फिर मीम कल्चर और राजनीतिक व्यंग्य शुरू किया है.
पार्टी का ‘मैनिफेस्टो’ क्यों चर्चा में है?
इस पार्टी ने अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया पर एक मजेदार मेनिफेस्टो जारी किया है. उसमें बेरोजगारी, महंगाई, युवा निराशा, नौकरी संकट, राजनीतिक बयानबाजी और सिस्टम से नाराजगी को व्यंग्यात्मक अंदाज में उठाया गया. पार्टी ने खुद को “Lazy but Democratic” जैसे शब्दों से पेश किया, जिसने Gen-Z और इंटरनेट यूजर्स को तेजी से आकर्षित किया. सोशल मीडिया पर हजारों लोग खुद को “कॉकरोच” बताते हुए अब इस पार्टी और उसकी विचारधारा के समर्थन में पोस्ट कर रहे हैं.
कई नेताओं का मिला समर्थन
मामला तब और बड़ा हो गया जब महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद जैसे नेताओं ने पार्टी से जुड़ने की इच्छा जाहिर की. इसके बाद से ही यह पेज और पाटी जमकर वायरल हुई है. विपक्षी खेमे के कई समर्थकों ने इस पार्टी को अपना समर्थन दिया है. पेपर लीक, नौकरी की कमी, मानसिक तनाव और सिस्टम से नाराज़गी जैसे मुद्दे लगातार इसके पोस्ट्स और चर्चाओं में दिखाई दे रहे हैं.
यह कोई आधिकारिक चुनावी पार्टी नहीं है और न ही चुनाव आयोग में इसका रजिस्ट्रेशन सामने आया है.अभी तक यह मुख्य रूप से एक डिजिटल सटायर (satire) और ऑनलाइन राजनीतिक कैंपेन के रूप में ही देखा जा रहा है.
घोषणापत्र आ रहा हर किसी को पसंद
अन्य राजनीतिक दलों की तरह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने भी अपना घोषणापत्र जारी किया है, जिसने इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोरी हैं. घोषणापत्र में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही गई है. इसके अलावा पक्षपाती मीडिया और एंकरों के खिलाफ कार्रवाई, मुख्य न्यायाधीशों को रिटायरमेंट के बाद राज्यसभा सीट न दिए जाने और राजनीतिक दलबदल पर सख्त रोक जैसी मांगें भी शामिल हैं.
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