‘निर्मला सप्रे की सदस्यता पर दो महीने में फैसला करें’, सुप्रीम कोर्ट ने MP विधानसभा अध्यक्ष को दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से बीना विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर दो महीने में फैसला लेने के लिए कहा
Supreme Court Membership Directive: मध्य प्रदेश के सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिया है. विधानसभा सदस्यता को लेकर उच्चतम न्यायालय ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को दो महीने के भीतर निर्णय लेने के लिए कहा है. इस मामले में याचिका साल 2024 से लंबित है.
उमंग सिंघार ने दायर की थी याचिका
विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका में कहा गया था कि साल 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में निर्मला सप्रे कांग्रेस के टिकट पर बीना से विधायक बनीं और बाद में बीजेपी में शामिल हो गईं. इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने संविधान की दसवीं अनुसूची से मामले को निपटाने के लिए कहा है. सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से सप्रे की विधायकी शून्य करने की मांग की थी. सिंघार की ओर से ओर सुप्रीम कोर्ट में पक्ष सीनियर एडवोकेट और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने रखा.
बीजेपी के कई कार्यक्रमों में दिखीं
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रचार करने सागर जिले के राहतगढ़ पहुंचे थे. इस दौरान वे सीएम के साथ निर्मला सप्रे मंच साझा करते हुए दिखाई दीं. इसी मंच से उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का ऐलान किया था. इसके साथ ही भोपाल स्थित बीजेपी मुख्यालय में हुए कार्यक्रम में दिख चुकी हैं.
सिंघार ने सप्रे की विधायकी रद्द करने को लेकर याचिका मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में लगाई थी. जिसे कोर्ट ने क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए खारिज कर दिया और मुख्य खंडपीठ जाने के लिए कहा. यहां से मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.



