‘भोजशाला परिसर मंदिर है…’, यह फैसला सुनाने के लिए किन सबूतों को कोर्ट ने माना आधार? 

Dhar Bhojshala Order: मध्‍य प्रदेश की धार भोजशाला को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का फैसला सामने आ चुका है. इसमें कोर्ट ने माना कि भोजशाला पर‍िसर में वाग्देवी मंदिर है. हालांकि मुस्‍ल‍िम पक्ष ने कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है.
धार भोजशाला

धार भोजशाला

Dhar Bhojshala: मध्‍य प्रदेश हाईकोर्ट ने आज बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि धार की भोजशाला असल में वाग्देवी मंदिर है. कोर्ट ने यह फैसला सुनाने के पीछे ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई की सर्वे रिपोर्ट को आधार माना है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐतिहासिक और संरक्षित जगह देवी सरस्वती का मंदिर है. केंद्र सरकार और ASI यह फैसला लें कि भोजशाला मंदिर का मैनेजमेंट कैसा रहेगा. इस फैसले के बाद हिंदू पक्ष में जश्न का माहौल है, जबकि मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है. इस फैसले के पीछे मूर्तियां, श्लोक और हवन कुंड जैसे सबूत हिंदू पक्ष की जीत के कारण बने हैं.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐतिहासिक साक्ष्य, साहित्य, संरचनाएं और ASI की रिपोर्ट यह स्थापित करती हैं कि यह स्थान राजा भोज से जुड़ा संस्कृत अध्ययन और देवी वाग्देवी सरस्वती की आराधना का प्रमुख केंद्र था.

98 दिन चला था सर्वे

इस मामले को लेकर साल 2022 में भोजशाला को लेकर याचिका दायर की गई थी. सुनवाई के बाद साल 2024 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भोजशाला परिसर का 98 दिन तक सर्वे किया था. इस दौरान कई जगहों की जांच की गई, जिसे कोर्ट में पेश किया गया. इसी को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाने के लिए उन्हीं को आधार माना है.

मंदिर में मिले थे कई प्रमाण

इस सर्वे के दौरान परिसर की दीवारों और खंभों पर कई ऐसे चिन्ह और आकृतियां मिली जिन्हें हिंदू मंदिर स्थापत्य से जुड़ा माना गया. रिपोर्ट में कमल, केले के स्तंभ, घंटियां, पल्लव, श्रीफल युक्त कलश और देवी-देवताओं की उकेरी गई मूर्तियों का उल्लेख किया गया. इसके अलावा संस्कृत श्लोक, शिलालेख और धार्मिक प्रतीकों के भी प्रमाण मिले. ASI ने इन सभी अवशेषों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई थी.

कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए क्या कहा?

भोजशाला को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि यह पूरा पर‍िसर हिंदू मंदिर है. भोजशाला का मूल स्वरूप संस्कृत शिक्षा का केन्द्र था. हाईकोर्ट ने कहा कि पुरातत्व एक विज्ञान है और कोर्ट वैज्ञानिक निष्कर्षों पर भरोसा कर सकती है.हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाली संरचनाओं का संरक्षण करे.

अब मुस्लिम समुदाय नहीं कर पाएगा नमाज

मध्‍य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में मुस्लिम समुदाय द्वारा परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति समाप्त करने की बात कही है. अदालत ने मुस्लिम पक्ष को सुझाव दिया है कि वे सरकार के समक्ष किसी अन्य उपयुक्त भूमि के आवंटन के लिए प्रतिनिधित्व प्रस्तुत कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें: Dhar Bhojshala Verdict: धार भोजशाला को इंदौर हाई कोर्ट ने माना वाग्देवी मंदिर, ASI के सर्वे पर जताया संतोष

ज़रूर पढ़ें