MP News: रीवा में कलेक्टर की सख्ती से हड़कंप, कर्मचारियों ने खोला मोर्चा, कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन

MP News: नाराज कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों ने संभागीय कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर के खिलाफ ज्ञापन सौंपते हुए कार्रवाई पर नाराजगी जताई.
Employees Resent Collector's Strictness

कलेक्टर की सख्‍ती पर कर्मचारी नाराज

MP News: रीवा जिले में इन दिनों प्रशासनिक सख्ती और कर्मचारियों के विरोध के बीच बड़ा टकराव खुलकर सामने आ गया है. कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी की तेजतर्रार कार्यशैली और लगातार बढ़ती सख्ती से जनपद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारी और अधिकारी खुलकर विरोध पर उतर आए हैं. नाराज कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों ने संभागीय कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर के खिलाफ ज्ञापन सौंपते हुए कार्रवाई पर नाराजगी जताई.

जनता खुश, लेकिन कर्मचारियों में बेचैनी

एक तरफ जिले की जनता नए कलेक्टर की सक्रियता और ताबड़तोड़ कार्रवाई से खुश दिखाई दे रही है, तो दूसरी तरफ वर्षों से ढीले रवैये में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच बेचैनी साफ दिखाई दे रही है. रीवा में पदभार संभालने के बाद से ही कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने साफ संकेत दे दिए थे कि अब लापरवाही और ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

सुबह-सुबह ऑफिस पहुंचकर ली कर्मचारियों की क्लास

नवागत कलेक्टर ने सबसे पहले सरकारी कार्यालयों की हकीकत जानने के लिए सुबह-सुबह औचक निरीक्षण शुरू किया. कई दफ्तरों में समय पर कर्मचारी गायब मिले. कुछ चुनिंदा कर्मचारियों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश कर्मचारी कार्यालय समय का पालन करते नजर नहीं आए. इसके बाद कलेक्टर ने वहीं कर्मचारियों की जमकर क्लास लगाई और साफ चेतावनी दी कि अब “सरकारी नौकरी मतलब जिम्मेदारी” होगी, सिर्फ वेतन लेने का दौर खत्म होगा.

जनसुनवाई में उमड़ी भीड़ ने खोली सिस्टम की पोल

कलेक्टर की जनसुनवाई शुरू होते ही लोगों की लंबी-लंबी कतारें लगने लगीं. इससे यह साफ हो गया कि जिले में आम जनता के काम लंबे समय से लटकाए जा रहे थे. ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने शिकायतों का अंबार लगा दिया, जिससे सरकारी तंत्र की सुस्ती उजागर हो गई.

मनरेगा समीक्षा में फूटा कलेक्टर का गुस्सा

जिला पंचायत की समीक्षा बैठक में जब मनरेगा कार्यों की स्थिति सामने आई तो रीवा जिले की रैंकिंग प्रदेश में नीचे से दूसरे नंबर यानी 52वें स्थान पर मिली. यह देखकर कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी भड़क उठे. उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि “इस तरह काम नहीं चलेगा, नौकरी करनी है तो काम करना पड़ेगा. कलेक्टर ने यह भी साफ कर दिया कि अब जितना काम, उतना वेतन की नीति पर सख्ती से अमल होगा. लापरवाही करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई तय मानी जाएगी.

सख्ती से बौखलाए कर्मचारी, कमिश्नर के दरबार पहुंचे

कलेक्टर के कड़े तेवर कर्मचारियों को रास नहीं आए. जिला पंचायत, जनपद पंचायत और कई कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि एकजुट होकर संभागीय कमिश्नर कार्यालय पहुंचे. वहां उन्होंने कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञापन सौंपा और कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव डालने का आरोप लगाया.

काम से डर या जवाबदेही से परेशानी?

रीवा में इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है क्या कर्मचारियों को काम करने में दिक्कत है या फिर वर्षों से चली आ रही ढिलाई पर लगाम कसने से परेशानी हो रही है? जनता अब खुलकर कह रही है कि यदि अधिकारी और कर्मचारी समय पर काम करें तो लोगों को दर-दर भटकना न पड़े.

रीवा में बदल रहा प्रशासनिक माहौल

रीवा में नए कलेक्टर की एंट्री के बाद प्रशासनिक व्यवस्था में तेजी दिखाई देने लगी है. अब देखना यह होगा कि कर्मचारियों का विरोध रंग लाता है या फिर कलेक्टर की सख्ती से जिले की व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा.

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