नई व्यवस्था से किसानों की बढ़ी परेशानी, फार्मर आईडी नहीं तो खाद मिलने में अड़चन
प्रदेशभर में खाद की किल्लत
Sagar Tikamgarh Kisan Pareshan: खरीफ सीजन शुरू होते ही कई जिलों में किसानों को खाद लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. सरकार ने खाद वितरण को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ई-विकास प्रणाली के तहत ऑनलाइन ई-टोकन व्यवस्था लागू की है. अब किसानों को खाद लेने के लिए पहले ऑनलाइन टोकन लेना पड़ता है और इसके साथ फार्मर आईडी (किसान आईडी) भी जरूरी कर दी गई है. यही नई व्यवस्था कई किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है.
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में करीब 3.78 लाख किसान हैं, लेकिन इनमें से केवल 1.21 लाख किसानों की ही फार्मर आईडी बनी है. वहीं सिर्फ 31.9 हजार किसानों का पंजीयन पूरा हो पाया है.
इससे साफ है कि बड़ी संख्या में किसान अभी भी नई व्यवस्था से बाहर हैं. ऐसे किसानों को खाद लेने में कठिनाई हो रही है और उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.
क्या है सबसे बड़ी समस्या?
सबसे बड़ी समस्या उन किसानों के सामने आ रही है जिनकी जमीन का बंटवारा नहीं हुआ है या राजस्व रिकॉर्ड में नाम और आधार की जानकारी मेल नहीं खाती. कई मामलों में खसरे में दर्ज नाम और आधार कार्ड में अंतर होने के कारण फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है. ऐसे किसानों की शिकायत है कि वे समय पर खाद नहीं खरीद पा रहे हैं.
कैसी है नई खाद की व्यवस्था
नई व्यवस्था के तहत किसान को पहले ऑनलाइन टोकन लेना होगा. टोकन जारी होने के बाद 72 घंटे तक वह मान्य रहेगा. इसके बाद किसान निर्धारित केंद्र से खाद प्राप्त कर सकेगा. अधिकारियों का कहना है कि इससे खाद की कालाबाजारी और फर्जी खरीद पर रोक लगेगी तथा वास्तविक किसानों तक खाद पहुंचाने में मदद मिलेगी.
फार्मर आईडी बनवाने के लिए किसान का आधार नंबर, मोबाइल नंबर, बैंक खाते की जानकारी और भूमि से जुड़े दस्तावेज जरूरी हैं, जिन किसानों का रिकॉर्ड पूरी तरह अपडेट नहीं है, उन्हें पहले अपने दस्तावेज ठीक कराने होंगे. इसके लिए तहसील और राजस्व विभाग के कार्यालयों में आवेदन करना पड़ रहा है.
हेल्पलाइन की भी बनाई व्यवस्था
किसानों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए प्रशासन ने हेल्पलाइन और विशेष शिविरों की व्यवस्था की है. अधिकारियों का कहना है कि जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनी है, वे शिविरों में जाकर दस्तावेजों की जांच और सुधार करा सकते हैं. साथ ही ऑनलाइन पंजीयन की प्रक्रिया को भी तेज किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई व्यवस्था से जोड़ा जा सके.
हालांकि सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था भविष्य में किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी, लेकिन फिलहाल फार्मर आईडी और पंजीयन की धीमी रफ्तार के कारण हजारों किसान खाद लेने में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि सभी पात्र किसानों का जल्द से जल्द पंजीयन पूरा कराया जाए, ताकि खेती के महत्वपूर्ण समय में उन्हें खाद की कमी न झेलनी पड़े.
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