Khandwa: UCC ड्राफ्ट को कैबिनेट की मंजूरी पर मुस्लिम समाज नाराज, बोले- शरीयत में दखल मंजूर नहीं, मुस्लिमों को भी रखा जाए बाहर
यूसीसी ड्राफ्ट मंजूरी पर नाराज मुस्लिम समाज
रिपोर्ट – शेख शकील
Khandwa News: मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने रविवार को एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी. इसे लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समाज के सभी वर्गों से सुझाव लेकर यह ड्राफ्ट बिल तैयार किया गया था और समाज के अधिकांश लोगों ने इसका समर्थन किया है.
मुख्यमंत्री के अनुसार यह बिल आदिवासी समुदाय को छोड़कर समाज के सभी वर्गों पर लागू होगा. वहीं, इस फैसले पर मुस्लिम समाज की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. मुस्लिम समाज ने इसे निकाह, तलाक और विरासत जैसे मामलों में सरकार की दखलअंदाजी बताते हुए विरोध जताया है. साथ ही आदिवासी समाज की तरह मुस्लिम वर्ग को भी इस बिल से बाहर रखने की मांग की है.
UCC ड्राफ्ट को कैबिनेट की मंजूरी
मध्य प्रदेश के भोपाल में रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य कैबिनेट ने UCC से जुड़े ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी. इसके बाद अब प्रदेश में पुरुषों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय की गई है. साथ ही UCC के तहत शादी का रजिस्ट्रेशन भी अनिवार्य कर दिया गया है. यही नहीं, इस अधिनियम के लागू होने के बाद प्रदेश में बहुविवाह और तीन तलाक पर पूर्ण रूप से रोक रहेगी.
अब कोई भी व्यक्ति एक समय में केवल एक ही जीवित जीवनसाथी के साथ वैवाहिक संबंध में रह सकेगा. इसके अलावा इस्लामी कानून में वसीयत से जुड़ी एक-तिहाई हिस्सेदारी की व्यवस्था भी इस कानून के लागू होने के बाद समाप्त हो जाएगी. हालांकि इस कानून से आदिवासी समुदाय को बाहर रखा गया है.
‘दूसरे वर्ग को खुश करना मकसद’
इधर, UCC ड्राफ्ट को कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही मुस्लिम समाज में विरोध देखने को मिला. प्रदेश के खंडवा जिले के मुस्लिम यूथ समाज अध्यक्ष जाहिद अहमद ने कहा कि इस समय भाजपा शासित राज्यों में संविधान के अनुच्छेद 44 का उपयोग करते हुए UCC लागू करने का काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि संविधान सभी को समान अधिकार जरूर देता है, लेकिन इसके साथ ही अनुच्छेद 25, 26, 28 और 30 धार्मिक आधार पर भिन्नताओं को भी मान्यता देते हैं.
उनका पालन नहीं किया जा रहा है. यह केवल एक समाज विशेष की मान्यताओं को समाप्त करने का प्रयास है. समान कानून लाना सभी धर्मों के नियमों में दखलअंदाजी करना है. आदिवासी समाज को छोड़कर मुस्लिम समाज को इसमें शामिल करना केवल मुस्लिम समाज की धार्मिक मान्यताओं में हस्तक्षेप है. उनका आरोप है कि इसका मकसद दूसरे वर्ग को खुश करना है और प्रदेश के रोजगार, महिला अत्याचार तथा बढ़ते कर्ज जैसे मुद्दों से ध्यान हटाना है.
‘शरीयत के हिसाब से आगे भी हल करेंगे मामले’
इधर, खंडवा शहर काजी सैयद निसार अली के अनुसार UCC लागू करने से पहले प्रदेश सरकार ने हर शहर में सुझाव लेने के लिए बैठकें बुलाई थीं, जिनमें उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराया था. उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश सरकार सभी पर समान कानून लागू करने की बात करती है, तो आदिवासी समाज को इससे बाहर क्यों रखा गया. मुस्लिम समाज में शादी, निकाह, विरासत और तलाक जैसे मामलों का समाधान हमेशा शरीयत के अनुसार होता रहा है और आगे भी उसी तरह किया जाएगा.
हालांकि शादी की उम्र से संबंधित नियम का पालन समाज पहले से ही करता आ रहा है. इसलिए उनकी मुख्यमंत्री से मांग है कि आदिवासी समाज की तरह मुस्लिम समाज को भी इस कानून से बाहर रखा जाए, ताकि वे अपने व्यक्तिगत मामलों का समाधान आगे भी शरीयत के अनुसार कर सकें.
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