एक ही गोत्र में शादी करने पर कुशवाह समाज का ‘तुगलकी फरमान’, दोनों परिवारों का आजीवन निष्कासन, 51-51 हजार का जुर्माना
बड़वानी में कुशवाहा समाज ने एक ही गोत्र में शादी करने पर परिवारों को निष्कासित किया.
Input- सचिन राठौर
MP News: बड़वानी जिले के राजपुर में कुशवाह समाज द्वारा एक ही गोत्र में शादी करने पर जारी किए गए कथित ‘तुगलकी फरमान’ का मामला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है. कोर्ट ने समाज के पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. साथ ही पुलिस को पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने के निर्देश दिए हैं.
मामला राजपुर निवासी महेंद्र लोनार के परिवार से जुड़ा है. पीड़ित पक्ष के अनुसार उनके बेटे का राजपुर की ही एक युवती से प्रेम प्रसंग था. दोनों बालिग हैं. दोनों पक्षों ने परिवारों की सहमति से शादी तय की. दोनों परिवार एक ही गोत्र के थे, जिसको लेकर पहले समाज में चर्चा की गई. युवती के मामा ने उसे विधिवत गोद लेकर कन्यादान भी किया.
धर्मशाला किराए पर दी, बाद में बदल दी जगह
पहले विवाह समारोह राजपुर स्थित कुशवाह समाज की धर्मशाला में तय था. समाज ने इसके लिए धर्मशाला किराए पर भी दी थी. लेकिन किन्ही कारणों से विवाह टल गया. इसके बाद मई माह में विवाह बड़वानी में करने का निर्णय लिया गया.
जनवरी से शुरू हुआ बैठकों का दौर
पीड़ित महेंद्र लोनार का आरोप है कि इसके बाद जनवरी माह से समाज में बैठकों का दौर शुरू हुआ. समाज की कमेटी ने फरमान जारी किया कि यदि कोई भी व्यक्ति इस विवाह में शामिल हुआ तो उसे 2100 रुपये दंड देना होगा. इसके बावजूद विवाह में करीब एक हजार समाज के लोग और 4 से 5 सौ अन्य लोग शामिल हुए.
पहले 11 साल फिर आजीवन निष्कासन
शादी के बाद समाज कमेटी ने पहले दोनों परिवारों को 11 साल के लिए समाज से निष्कासित किया. बाद में इसे बढ़ाकर आजीवन निष्कासन कर दिया गया. साथ ही दोनों परिवारों पर 51-51 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. कमेटी ने यह भी कहा कि यदि एक माह में जुर्माना जमा नहीं किया गया तो दंड राशि बढ़ाकर 5100 रुपये कर दी जाएगी और संबंधित व्यक्ति को भी समाज से निष्कासित कर दिया जाएगा.
हर जगह गुहार के बाद पहुंचे हाईकोर्ट
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने इस मामले में समाज के फोरम सहित शासन और प्रशासन के अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने समाज संगठन के पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को पीड़ित परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं.
युवक-युवती बोले- हम बालिग हैं
युवक और युवती का कहना है कि संगठन के लोग उन्हें और विवाह में शामिल हुए समाज के लोगों व रिश्तेदारों को बेवजह परेशान कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब अंतरजातीय विवाह हो रहे हैं तो समाज को इस तरह का फरमान जारी नहीं करना चाहिए.
समाज का अपना बायलॉज, कानून से कोई लेना-देना नहीं
बताया जाता है कि कुशवाह समाज ने संगठन बनाकर अपना बायलॉज तैयार किया है, जिसमें समाज की अपनी शर्तें हैं. संगठन का कानून से कोई संबंध नहीं है. इस संगठन से खरगोन, बड़वानी और धार जिले के करीब 57 गांवों के लगभग 30 हजार लोग जुड़े हैं. अकेले राजपुर में ही समाज के करीब 5 हजार लोग और 1025 मकान हैं.
इस संबंध में कुशवाह समाज के जिला अध्यक्ष रमेशचंद कुशवाह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन पर लगे सभी आरोप निराधार हैं. उन्हें अभी तक कोर्ट का नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है. नोटिस मिलने के बाद वे न्यायालय में अपना पक्ष रखेंगे.
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