बालाघाट में बैगा बच्चों की मौत के मामले में राज्य सरकार का एक्शन, टीकाकरण और मलेरिया अधिकारी को हटाया गया
जिला टीकाकरण अधिकारी परेश उपलव को हटाया गया
Balaghat News: बालाघाट में बैगा जनजाति के बच्चों की मौत के मामले में राज्य सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है. जिला टीकाकरण अधिकारी परेश उपलव और मलेरिया अधिकारी मनीषा जुनेजा को हटा दिया गया है. CMHO परेश उपलव लंबे वक्त से इस पद पर तैनात थे. अब उनके स्थान पर डॉ. पारितोष शुक्ला को ये जिम्मेदारी दी गई है. वहीं, मनीषा जुनेजा का जबलपुर ट्रांसफर कर दिया गया है. उनके स्थान पर ब्रजेश पटेल को कमान मिली है. जिले में बैगा बहुल क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान में लापरवाही को लेकर ये एक्शन लिया गया है.
आज बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड के ग्राम मछुरदा पहुंचकर बीमारी से प्रभावित बैगा जनजाति के परिवारों से भेंट की। इस दौरान परिवारों से उनकी सामाजिक स्थिति, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं तथा बच्चों की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।
— Rajendra Shukla (@rshuklabjp) August 22, 2026
जनजातीय समुदाय के परिवारों को… pic.twitter.com/JjWHjaH5Qz
डिप्टी सीएम ने ग्रामीणों से चर्चा की
डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने शनिवार (22 अगस्त) को मछुरदा ग्राम का दौरा किया. यहां उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात की. उन्होंने लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही थी. इसके बाद एक्शन लेते हुए जिला टीकाकरण अधिकारी और मलेरिया अधिकारी को हटा दिया गया.
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों में बच्चों की मृत्यु हुई है, उनके प्रति सरकार की पूरी संवेदना है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी मामले को गंभीरता से लिया है. उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र हाल ही में नक्सलवाद से मुक्त हुआ है और अब शासन की योजनाएं एवं स्वास्थ्य सुविधाएं दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाई जा रही हैं. मछुरदा के उप स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए.
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क्या है पूरा मामला?
बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड के आदिवासी के गांवों में बैगा जनजाति बहुल गांव में बच्चों की मौत हो गई. मीडिया रिपोर्ट में इसकी अलग-अलग वजहें सामने आ रही हैं, जिनमें टीकाकरण समय पर ना होना, मलेरिया, कुपोषण बताया जा रहा है. ICMR की रिपोर्ट में सामने आया कि यहां मीजल्स का प्रकोप हो गया है. कांग्रेस का दावा है कि इन गांवों में 15 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी हैं.