CM विजय थलापति के नाम पर बुजुर्ग से ठगे 7.52 लाख, एक करोड़ की मदद का दिया था झांसा
बुजुर्ग के साथ ठगी
MP News: मध्य प्रदेश के जबलपुर में साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है. यहां फेसबुक के जरिए 69 वर्षीय बुजुर्ग को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने का लालच देकर ठगों ने 7.52 लाख रुपये ऐंठ लिए. आरोपियों ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलापति के नाम का सहारा लेकर बुजुर्ग को अपने जाल में फंसाया. जब ठगों ने सोना लाने और पुलिस के पकड़े जाने की कहानी सुनाकर दोबारा पैसे मांगे, तब पीड़ित को संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस से शिकायत की.
फेसबुक लिंक पर क्लिक करते ही आने लगे फोन
जबलपुर के गुप्तेश्वर क्षेत्र में रहने वाले 69 वर्षीय प्रवेश धीर को फेसबुक पर आर्थिक सहायता और ऋण उपलब्ध कराने से जुड़ा एक लिंक दिखाई दिया था. उन्होंने जैसे ही उस लिंक पर क्लिक किया, कुछ समय बाद उनके पास चार अलग-अलग मोबाइल नंबरों से फोन आने लगे. फोन करने वालों ने खुद को विजय थलापति से जुड़ा बताया और एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दिलाने का भरोसा दिया. बड़ी रकम मिलने की उम्मीद में प्रवेश उनकी बातों पर विश्वास कर बैठे.
सात बार स्कैनर भेजकर खातों में जमा कराए पैसे
आरोपियों ने आर्थिक सहायता की प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर उनसे अलग-अलग चरणों में पैसे जमा करवाए. इसके लिए सात बार स्कैनर भेजे गए और विभिन्न बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई. इस तरह बुजुर्ग से कुल 7.52 लाख रुपये ठग लिए गए. पैसे लेने के बाद भी आरोपियों ने उनसे संपर्क बनाए रखा और ठगी का सिलसिला आगे बढ़ाने की कोशिश की.
सोना लाने और पुलिस के पकड़ने की सुनाई कहानी
रुपये मिलने के बाद ठगों ने एक नई कहानी गढ़ी. उन्होंने प्रवेश धीर को बताया कि वे उनके लिए सोना लेकर आ रहे थे, लेकिन रास्ते में पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया है. आरोपियों ने कथित तौर पर उन्हें छुड़ाने के नाम पर 60 हजार रुपये और मांगे. लगातार पैसों की मांग किए जाने पर प्रवेश को शक हुआ. इसके बाद उन्होंने मामले की जानकारी पुलिस को दी.
मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की जांच में जुटी पुलिस
शिकायत मिलने के बाद जबलपुर के गोरखपुर थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने गुरुवार को प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी. पुलिस संबंधित मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और पैसों के लेनदेन की जानकारी जुटा रही है. थाना प्रभारी नितिन कमल के मुताबिक, साइबर टीम की मदद से आरोपियों की पहचान करने और उन तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है.
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