एक साल की मेहनत से कमलेश के पैरों में लौटी जान, कलेक्टर ने कहा- चिंता मत करो, हम सब तो हैं

MP News: करीब एक साल पहले छत से गिरने के बाद कमलेश की रीढ़ की हड्डी में गंभीर समस्या हो गई. इलाज के अभाव में वह बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गया था.
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कमलेश

रिपोर्ट – भूपेन्द्र वशिष्ठ, विस्तार न्यूज टीकमगढ़

MP News: टीकमगढ़ जिले में कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय की पहल और व्यक्तिगत मदद से एक ऐसे युवक की जिंदगी में उम्मीद की किरण लौटी है, जिसने अपने पैरों पर दोबारा खड़े होने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी. यह कहानी है कमलेश आदिवासी की है, जो अनाथ है. माता-पिता का पहले निधन हो चुका है, बहनों की शादी हो चुकी है और उसके दो भाई रोजी-रोटी की तलाश में बाहर मजदूरी करने गए हैं.

छत से गिरने पर रीढ़ की हड्डी में आई समस्‍या

करीब एक साल पहले छत से गिरने के बाद कमलेश की रीढ़ की हड्डी में गंभीर समस्या हो गई. इलाज के अभाव में वह बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गया था. घर में अकेले रहने वाले कमलेश को अपने भविष्य की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी. इसी बीच मातृ-पितृ वृद्धाश्रम की महिलाओं ने कमलेश को उसके गांव तखा से आश्रम लाकर उसकी देखभाल शुरू की. यहां उसके खाने-पीने और रहने की व्यवस्था की गई.

बताया जाता है कि अपने जन्मदिन के दिन कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय जब वृद्धाश्रम पहुंचे, तो उनकी मुलाकात कमलेश से हुई. कलेक्टर ने जब उसका हाल जाना तो कमलेश भावुक होकर रो पड़ा और कहा ‘मेरा कोई नहीं है.’ कमलेश की बात सुनकर कलेक्टर ने उसे भरोसा दिलाया कि ‘चिंता मत करो, हम सब तो हैं.’

फिजियोथेरेपी से पैरों में आई जान

इसके बाद कलेक्टर जिला अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों से कमलेश की रीढ़ की समस्या को लेकर चर्चा की. डॉक्टरों ने ऑपरेशन को संभव नहीं बताया और फिजियोथेरेपी से राहत मिलने की बात कही. इसके बाद कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने कमलेश के इलाज और फिजियोथेरेपी की जिम्मेदारी उठाई और व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक मदद की.

करीब एक साल की लगातार देखभाल और फिजियोथेरेपी के बाद अब कमलेश अपने पैरों पर चलने लगा है. विस्तार न्यूज से बातचीत के दौरान कमलेश भावुक हो गया. उसकी आंखों में आंसू थे और उसने कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी मदद से उसकी जिंदगी में फिर से उम्मीद लौटी है. एक अधिकारी की संवेदनशील पहल और एक युवक की जिंदगी में लौटती उम्मीद कमलेश की कहानी आज इंसानियत की एक मिसाल बन गई है.

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