गाय-बैल, गुड़ का चीला और गेड़ी…बेहद खास है छत्तीसगढ़ का ‘हरेली’ तिहार, जानें क्या होता है इस दिन
Chhattisgarh Hareli Tihar Celebration Traditions: हरेली त्योहार हरियाली का प्रतीक माना जाता है किसान अपनी फसल की सुरक्षा की कामना करते हुए हरेली त्यौहार मनाते हैं. जब किसान आषाढ़ के महीने में अपने खेत में फसल उगाता है तो श्रावण महीने के आते धान की फसल हरा-भरा हो जाता है तब किसान अपनी फसल की सुरक्षा हेतु हरेली तिहार मनाते हैं.
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श्वेक्षा पाठक
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Last Updated: Aug 06, 2026 12:48 PM IST
'धान का कटोरा' के नाम से प्रसिद्ध राज्य छत्तीसगढ़ में त्योहारों की शुरुआत ‘हरेली’ से होती है.
इस दिन हर जगह गाय-बैल, नीम, गुड़ का चीला और गेड़ी नजर आएंगे. यह त्योहार कृषि और हरियाली से जुड़ा हुआ है.
हरेली तिहार के दिन किसान खेतों में जाकर पूजा-पाठ करते हैं. वह भगवान से फसल की समृद्धि, कीटों से रक्षा और घर में लक्ष्मी के वास की कामना करते हैं.
इस दिन घर-घर गुड़ का चीला बनता है और गेड़ी खेली जाती है. किसान भगवान से खेत में अच्छे उपज की कामना करते हैं.
हरेली के दिन घर-घर गुड़ का चीला के अलावा पारंपरिक पकवान जैसे गुलगुल भजिया आदि बनाए जाते हैं.
इसके अलावा इस दिन बांस से गेड़ी बनाई जाती है. बच्चे और युवा इकट्ठा होकर गेड़ी खेलते हैं. साथ ही गेड़ी दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाता है.
इस दिन किसान अपने कृषि औजार जैसे- हल, नांगर, कोपर, दतारी, टंगिया, बसुला, कुदारी, सब्बल को साफ कर पूजा करते हैं. इस अलावा गाय और बैलों को नहलाकर सजाते हैं.
इसके अलावा हरेली के दिन खेत और घरों में नीम की टहनी टांगने की भी परंपरा है. इसके साथ ही हरेली के दिन युवाओं के बीच नारियल फेंक प्रतियोगिता भी की जाती है.