दुल्हन की तरह सजती है बेटी, बंटती है मिठाई, भारत के इन राज्यों में पहली बार पीरियड्स आने पर मनाते हैं जश्न!
menstrual traditions in India: महिलाओं को पीरियड्स आना एक नेचुरल प्रोसेस है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, लड़कियों को पहली बार पीरियड्स आमतौर पर 10 से 15 वर्ष की उम्र के बीच आने शुरू होते हैं. आज के दौर में भी अगर पहली बार किसी लड़की को पीरियड्स आ जाएं, तो वह अपने घर वालों को बताने से डरती है और खुलकर बात नहीं कर पाती है. वहीं आज के समाज में भी लोग पीरियड्स जैसे शब्द को बोलने में सकुचाते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि देश के कुछ इलाकों में ऐसे भी लोग और समाज हैं, जहां अगर किसी लड़की को पहली बार या महिलाओं को पीरियड्स आते हैं, तो इस अवसर को एक त्योहार की तरह सेलिब्रेट किया जाता है. आइए जानते हैं कि किन जगहों पर पीरियड्स होने पर जश्न मनाया जाता है.
असम में लड़की की पहली पीरियड्स को तुलोनी बिया के रूप में मनाने की परंपरा है.
इस मौके पर शादी जैसी रस्में निभाई जाती हैं और लड़की को तैयार किया जाता है.
कर्नाटक में पहली पीरियड्स के मौके पर ऋतु शुद्धि या ऋतु कला संस्कार की रस्म निभाई जाती है.
इस दौरान लड़की को पारंपरिक कपड़े पहनाए जाते हैं और परिवार जश्न मनाता है.
तमिलनाडु में पहली पीरियड्स के अवसर पर मंजल नीराट्टु विझा मनाने की परंपरा है.
इस दौरान लड़की को हल्दी से स्नान कराया जाता है और रिश्तेदारों को आमंत्रित किया जाता है.
ओडिशा में रज पर्व मासिक धर्म और स्त्रीत्व से जुड़ा प्रमुख पारंपरिक उत्सव है.
इस दौरान महिलाओं और लड़कियों को घरेलू कामों से आराम देने की परंपरा है.
केरल के कुछ समुदायों में पहली पीरियड्स के अवसर पर पारंपरिक रस्में निभाई जाती हैं.
परिवार के लोग लड़की को नए कपड़े और आभूषण देकर इस बदलाव का स्वागत करते हैं.