CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरबा में चाकू से हमला करने के मामले में दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है.
CG High Court: अभियोजन के अनुसार, 2 जून 2013 को मरवाही थाना क्षेत्र के ग्राम धुम्माटोला में कमता प्रसाद पाठक उर्फ गन्नू की हत्या कर दी गई थी. आरोप था कि भवानी सिंह, जय सिंह और सुखसेन गोंड ने मिलकर हत्या की और शव को मिट्टी-पत्थर से ढंककर छिपा दिया.
CG News: छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में मंगलवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. आरोपी अनबर ढेबर और अनिल टुटेजा को कोर्ट से जमानत मिल गई है. दोनों आरोपियों को सशर्त जमानत दी गई है
CG High Court: डॉ. काले ने स्वयं न्यायालय में उपस्थित होकर दलील दी कि उन्होंने सीधे खेती की अनुमति नहीं मांगी थी, बल्कि केवल यह आग्रह किया था कि उनकी अभ्यावेदन पर कानून के अनुसार समयबद्ध निर्णय लिया जाए.
CG High Court: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं. पुलिस ईमेल की सत्यता की जांच कर रही है. बम और डॉग स्क्वॉड टीमों ने पूरे परिसर की सघन तलाशी की.
CG High Court: हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने रेलवे भूमि से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट करते हुए कहा है कि बिना वैध और नवीनीकृत लीज के रेलवे जमीन पर कब्जा रखने का कोई अधिकार नहीं है.
इससे पहले हाईकोर्ट ने भी देवेंद्र यादव की याचिका खारिज करते हुए प्रेम प्रकाश पांडेय की चुनावी याचिका को सुनवाई योग्य माना था. लेकिन देवेंद्र यादव ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
CG High Court: हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चयन विवाद से जुड़े मामले में दायर रिट अपील को खारिज कर दिया. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सिंगल बेंच के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया में कोई अवैधता या मनमानी साबित नहीं हुई है.
CG High Court: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने हत्या के एक मामले में महत्वपूर्ण प्रक्रिया संबंधी फैसला देते हुए, आजीवन कारावास की सजा को निरस्त कर दिया है और मामले में पुनः परीक्षण (री-ट्रायल) का आदेश दिया है.
CG High Court: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कार दुर्घटना में 53.40 लाख के मुआवजा मामले में सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि केवल आमने-सामने टक्कर से सहभागी लापरवाही नहीं मानी जा सकती. इसके लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं. साथ ही बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी.