‘उम्मीदवार नहीं मिल रहा तो CM खुद लड़ लें…’, अयोध्या सीट पर अखिलेश यादव ने दी सीएम योगी को चुनौती

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तीर्थ नगरी अयोध्या के दो दिवसीय दौरे के दौरान सीएम योगी को अयोध्या से चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दी. उन्होंने कहा कि अगर उम्मीदवार नहीं मिल रहा हो तो सीएम खुद चुनाव लड़ के देख लें.
Akhilesh Yadav

अखिलेश यादव

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तीर्थ नगरी अयोध्या के दो दिवसीय दौरे के दौरान अयोध्या विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के प्रत्याशी पवन पाण्डेय के कृष्णापुर आवास पर भागवत कथा का श्रवण किया. श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद ऐसा तीसरी बार है जब अखिलेश यादव अयोध्या पहुंचे हैं और उन्होंने इस दौरान भी राम मंदिर से दूरी बनाकर रखी है. भागवत कथा के आयोजन में पहुंचकर अखिलेश यादव ने यहां साधु-संतों से भेंट की और आशीर्वाद लिया.

सीएम योगी को अखिलेश की खुली चुनौती

इस दौरान उन्होंने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमने अयोध्या में अपनी पार्टी का प्रत्याशी घोषित किया है, भाजपा सर्वे पर सर्वे करा रही है. सुनने में आ रहा है कि अयोध्या में भाजपा को नया प्रत्याशी ही नहीं मिल पा रहा है. इस दौरान उन्होंने सीधे सीएम योगी को चुनौती देते हुए कहा कि अयोध्या में विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अगर इतने ही आश्वस्त हैं तो खुद अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाएं.

अयोध्या की जनता से अखिलेश ने किया वादा

अखिलेश यादव ने कहा कि दूध का दूध और पानी का पानी करने का झूठा दावा करने वालों का ‘पानी’ जनता उतार देगी. इस बार अयोध्या ही नहीं, पूरे प्रदेश की जनता ‘धन’ चुराने वालों को नहीं बख्शेगी. उन्होंने अपने भाषण के दौरान अयोध्या की जनता से वादा किया कि सपा सरकार बनने पर अयोध्या में विकास को गति देंगे. समाजवादी सरकार में भेदभाव नहीं होगा.

कथा मन और मनोबल को बढ़ाती है- अखिलेश यादव

अखिलेश यादव ने कहा कि ये प्रभु श्री राम की जन्मस्थली है. सभी हरि भक्त मिलकर जय राधे-श्याम कह रहे हैं. यही खूबसूरती है. मैं सोच रहा था कि अयोध्या जाकर किन बातों को रखूंगा. हम बचपन से रामायण-महाभारत सुनते आए हैं। हमारे लिए प्रभु श्री राम ही प्रभु श्री कृष्ण हैं. कथा मन और मनोबल को बढ़ाती है. भागवत कथा सीख देती है. सत्ता की एजेंसियों को सीखना चाहिए कि प्रेम, दया और अपनापन ही सबसे बड़ा धर्म है.

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि जो लोग प्रेम की भावना नहीं रखते, उनका अंत कंस की तरह होना तय है. उनके मुताबिक सत्ता आती-जाती रहती है लेकिन अगर प्रेम और संविधान टूट जाए तो सब खत्म हो जाता है. इसलिए आज सबसे बड़ी जरूरत संविधान और भाईचारे को बचाकर रखने की है. उन्होंने कहा कि बचपन में किसी ने बताया था कि जो भव के बंधन से मुक्त कराए वही भागवत और जो व्यथा हरे वही कथा.

अखिलेश यादव कहते हैं कि आज का समय बंधनों और व्यथाओं से भरा हुआ है- अहंकार के बंधन, सत्ता के बंधन, जाति के बंधन, भेदभाव के बंधन, वैमनस्य के बंधन, ऊंच-नीच के बंधन, छुआछूत के बंधन, शुद्धि-अशुद्धि के बंधन और भी अनेक प्रकार के सामाजिक और मानसिक बंधन, इसीलिए भागवत कथा का महत्व और प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है.

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