क्या खत्म हो गया दबदबा? 37 सालों बाद संसद से बाहर हुई चंद्रशेखर फैमिली
37 सालों बाद संसद से बाहर हुई चंद्रशेखर फैमिली
Neeraj Shekhar BJP Ticket Denied: उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 8 प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है. लेकिन इस बार BJP ने अपने किसी भी राज्यसभा सांसद को दोबारा मौका नहीं दिया है. इसमें एक नाम पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह के बेटे नीरज शेखर का भी नाम शामिल है. नीरज शेखर को राज्यसभा उम्मीदवार नहीं बनाए जाने की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है. क्योंकि शेखर परिवार में करीब 37 सालों बाद ऐसा होगा. जब कोई संसस में मौजूद नहीं होगा. अब सवाल यह भी पैदा हो रहा है कि क्या जिस शेखर परिवार का करीब 4 दशकों से संसद में दबदबा रहा हो. उसका सियासी वर्चस्व टूट गया?
उत्तर प्रदेश की राजनीति कहें या फिर देश की इसमें चंद्रशेखर परिवार का हमेशा दबदबा रहा है. भारतीय राजनीति में युवा तुर्क कहे जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह ऐसे कद्दावर नेता थे, जिनकी देश में सियासी तूती बोलती थी. वे अपने बेबाक अंदाज और निर्भीक स्वभाव के लिए जाने जाते थे. अब उनकी विरासत उनके बेटे नीरज शेखर संभाल रहे हैं. नीरज शेखर वर्तमान में भाजपा से राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन अब पार्टी ने उन्हें दोबारा चुनावी मैदान में नहीं उतारा है.
37 सालों बाद संसद से बाहर होगा शेखर परिवार
नीरज शेखर को दोबारा राज्यसभा का टिकट नहीं मिलना उनके समर्थकों के लिए बड़ा झटका है. ऐसा लग रहा है मानों शेखर परिवार की संसद में उपस्थिति का सिलसिला थम सा गया है. 37 सालों बाद बलिया का सबसे चर्चित राजनीतिक घराना संसद के किसी भी सदन में मौजूद नहीं होगा. नीरज शेखर को पहले समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा भेजा और अब भाजपा से सांसद हैं. लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि पार्टी ने उन्हें राज्यसभा तक के लिए उचित नहीं समझा. यह सवाल हर किसी के मन में तैर रहा है.
2 बार हार चुके हैं लोकसभा चुनाव
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वांचल में जो प्रभाव चंद्रशेखर सिंह परिवार का है. उसका बिल्कुल भी फायदा पार्टी को नहीं हुआ. जिसकी वजह से पार्टी ने नीरज शेखर का टिकट काटा होगा. इसके अलावा नीरज शेखर दो बार और दो पार्टियों से लोकसभा का चुनाव नहीं जीत सके. यह भी उनके करियर में बड़ा धब्बा है.
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विधानसभा चुनाव में मिल सकता है मौका
नीरज शेखर के पिता और पू्र्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह की अगर बात करें, तो वे 8 बार बलिया संसदीय सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. 2007 में उनके निधन के बाद विरासत को बेटे नीरज शेखर ने आगे बढ़ाया. अब राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने के बाद शेखर परिवार के पास सिर्फ विधानसभा का ही एकमात्र रास्ता बचा है. जिसके माध्यम से अपनी पारी शुरू कर सकते हैं. खबर है कि उनकी पत्नी फेफना विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही हैं.
हालांकि, उनकी राह आसान नहीं दिखाई देती है. फेफना से उपेंद्र तिवारी पहले से ही इस सीट पर अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं. वहीं नारद राय भी सदर से किस्मत न आजमाकर अबकी फेफना सीट पर नजरें जमाए हुए हैं. देखना दिलचस्प होगा कि आखिर में किसका दांव कामयाब होता है.