‘हम भारत जैसे नहीं…’, तेल भंडार को लेकर INDIA के मुरीद हुए पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री
पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक
Pakistan Oil Reserves: अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण पूरी दुनिया परेशान नजर आ रही है. इसका सीधा असर कई देशों के तेल भंडारण पर पड़ रहा है. कई देशों में काफी किल्लत भी देखने को मिल रही है. इन सब के बीच पाकिस्तान की ऊर्जा स्थिति पर बड़ा खुलासा सामने आया है.
देश के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने स्वीकार किया है कि पाकिस्तान के पास भारत जैसी रणनीतिक तेल भंडारण की सुविधा नहीं है. जिससे वह किसी भी बड़े संकट के सामने बेहद कमजोर स्थिति में खड़ा है. इससे साफ है कि ईरान संकट का असर पाकिस्तान पर भी पड़ रहा है. यही वजह है कि यहां तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं.
अली परवेज मलिक ने एक टीवी इंटरव्यू में मंत्री ने साफ कहा कि पाकिस्तान के पास केवल कमर्शियल तेल भंडार है, जो महज 5 से 7 दिनों तक ही चल सकता है. इसके अलावा रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद भी सीमित समय के लिए ही उपलब्ध हैं. किसी भी समय देश में तेल की किल्लत हो सकती है.
हम भारत जैसे नहीं- अली परवेज मलिक
अली परवेज मलिक ने भारत का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत के पास करीब 60–70 दिनों का तेल भंडार है, जिसे जरूरत पड़ने पर सरकार सिर्फ एक फैसले (सिग्नेचर) से बाजार में जारी कर सकती है. यही वजह है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत की स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है. लेकिन पाकिस्तान की हालत हर दिन खराब होती जा रही है.
आसमान छू रही कच्चे तेल की कीमतें
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेज़ी से बढ़कर करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. ऐसे में जिन देशों के पास पर्याप्त भंडार नहीं है, वहां ऊर्जा संकट गहराने का खतरा बढ़ गया है. पाकिस्तान की स्थिति इसलिए और गंभीर मानी जा रही है क्योंकि वह पहले से आर्थिक दबाव और IMF की शर्तों से जूझ रहा है. सीमित भंडार के कारण तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
मध्यस्थता में जुटा पाकिस्तान
पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कराने में लगा हुआ है. पहले दौरान की बातचीत भी पाकिस्तान में ही आयोजित की गई थी. 21 घंटे से ज्यादा समय तक चली बातचीत के बाद भी कोई समाधान नहीं निकल पाया था. वहीं दूसरे दौर की बातचीत के लिए प्रयास जारी हैं. इन सब के बीच होर्मुज पर अभी भी तनाव बना हुआ है. यही कारण है कि दुनियाभर में तेल की किल्लत देखने को मिल रही है.
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