मिडटर्म चुनाव में झटका लगा तो ट्रंप की बढ़ेगी मुश्किल, भारत पर नरम पड़ सकता है अमेरिकी रुख
डोनाल्ड ट्रंप
US Midterm Elections: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए मिड टर्म इलेक्शन बड़ी चुनौती बन सकते हैं. इन चुनावों का असर न केवल अमेरिका की घरेलू राजनीति, बल्कि दूसरे देशों के साथ उसके रिश्तों पर भी पड़ सकता है. भारत के पूर्व राजनयिक केपी फैबियन का बयान भी इन चुनावों को लेकर सामने आया है. उन्होंने कहा कि अगर चुनाव में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगता है तो उन्हें अपनी नीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है. खासकर भारत के साथ रिश्तों को लेकर उन्हें अपना रुख नरम करना पड़ सकता है.
पूर्व राजनयिक ने ट्रंप की भारत नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत पर भारी टैरिफ लगाना अमेरिकी राष्ट्रपति की बड़ी गलती रही है. भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी उसकी अहम भूमिका है. ऐसे में अमेरिका के लिए भारत को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.
भारत पर टैरिफ लगाने की नीति पर सवाल
केपी फैबियन के मुताबिक, रूस से तेल खरीदने के मामले में अमेरिका ने भारत के खिलाफ सख्त रुख अपनाया. जबकि चीन भी रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है. इसके बावजूद चीन के खिलाफ वैसी सख्ती नहीं दिखाई गई. इस तरह का अंतर अमेरिका की व्यापार नीति पर सवाल खड़े करता है.
उनका मानना है कि भारत के साथ रिश्ते खराब करना अमेरिका के हित में नहीं है. अगर ट्रंप घरेलू राजनीति में कमजोर होते हैं तो उन पर विदेश नीति को लेकर भी दबाव बढ़ सकता है.
ट्रंप के लिए क्यों अहम हैं मिडटर्म चुनाव?
अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर वोटिंग होना है. इन चुनावों से तय होगा कि अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा बना रहेगा या डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिलेगी.
अगर रिपब्लिकन पार्टी बहुमत खो देती है तो ट्रंप के लिए अपने फैसलों को लागू करना मुश्किल हो सकता है. विपक्षी पार्टी को मजबूती मिलने पर राष्ट्रपति के कामकाज की जांच और विरोध भी बढ़ सकता है.
ये भी पढ़ें: इजरायल में सत्ता पलटने की पटकथा तैयार? नेतन्याहू के खिलाफ 67 सीटों के गणित ने बढ़ाई चुनौती



