‘दिव्यांग बच्चों से भेदभाव बर्दाश्त नहीं’, स्कूल से निकाले जाने पर हाई कोर्ट ने रोक लगाते हुए की तल्ख टिप्पणी

पूरे मामले पर सोमवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की डिवीजन बेंच ने मामले पर सुनवाई करते हुए बच्चों को स्कूल से बाहर निकाले जाने पर रोक लगा दी. इसके साथ ही तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ये किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं है.
Jabalpur High Court (File Photo)

जबलपुर हाई कोर्ट(File Photo)

MP News: ‘दिव्यांग बच्चों के साथ भेदभाव ना सिर्फ गलत है, बल्कि अस्वीकार्य है. इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.’

ये तल्ख टिप्पणी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जबलपुर के दो स्कूलों से दिव्यांग बच्चों को निकाले जाने के मामले पर दी है. इसके साथ ही कोर्ट ने दिव्यांग बच्चों के स्कूल से निकाले जाने पर रोक लगा दी है और जिला शिक्षा अधिकारी से मामले में नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.

दो स्कूलों से निकाले गए थे दिव्यांग बच्चे

पूरा मामला जबलपुर के विजडम वैली स्कूल और जीडी गोयनका स्कूल से जुड़ा है. इन दोनों स्कूलों से दिव्यांग बच्चों को निकाल दिया गया था. जिसको लेकर जबलपुर निवासी सौरभ सुबैया नाम के व्यक्ति ने जनहित याचिका दायर की थी. जिसमें कहा गया था कि दिव्यांग बच्चों को निकाला जाना मौलिक अधिकारों का हनन है. पूरे मामले पर सोमवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की डिवीजन बेंच ने मामले पर सुनवाई करते हुए बच्चों को स्कूल से बाहर निकाले जाने पर रोक लगा दी. इसके साथ ही तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ये किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं है.

‘नहीं किया जा रहा कानून का पालन’

याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट में बताया गया कि जिले में लगभग 150 स्कूल हैं. इनमें से 50 प्राइवेट और 100 स्कूल सरकारी हैं. इन स्कूलों में दिव्यांग छात्रों की बड़ी संख्या है. विशेष बच्चों को पढ़ाने के लिए स्पेशल एजुकेटर नियुक्त नहीं किए जाते हैं. जबकि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत दिव्यांग बच्चों को भी शिक्षा का अधिकार दिया जाना जरूरी है. कानून के तहत स्पेशल एजुकेटर की नियक्ति जरूरी है, लेकिन इसके बावजूद ऐसा नहीं किया जा रहा है, जो कि असंवैधानिक है.

याचिकाकर्ता ने बताया कि कोर्ट का ये आदेश समावेशी विकास और दिव्यांग बच्चों के मौलिक अधिकार को संरक्षित करने में मजबूती देगा.

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