नर्सिंग के 30 हजार छात्रों को हाई कोर्ट से झटका! HC – बिना अनुमति नहीं होंगे एग्जाम, 28 अप्रैल से होने थे
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (स्त्रोत - ग्रेब )
MP News: नर्सिंग के 30 हजार से ज्यादा छात्रों को हाई कोर्ट से झटका लगा है. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े मामले में शुक्रवार (24 अप्रैल 2026) को सुनवाई की. जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अविनेंद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने कहा कि हाई कोर्ट की अनुमति के बिना परीक्षाएं आयोजित नहीं होंगी.
नर्सिंग काउंसिल को HC से अनुमति लेनी होगी
दरअसल, 28 अप्रैल से नर्सिंग की परीक्षाएं आयोजित की जानी थी. हाई कोर्ट ने सुनवाई में साफ किया कि नर्सिंग काउंसिल को उच्च न्यायालय से अनुमति लेनी होगी. इसके साथ रही अपात्र कॉलेजों के स्टूडेंट्स को पात्र कॉलेजों में ट्रांसफर की बात कही.
600 कॉलेज अपात्र पाए गए
लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने उच्च न्यायलय में एमपी में साल 2020-21 के दौरान खुले सैंकड़ों फर्जी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता को चुनौती दी थी. इस मामले की जांच CBI ने की. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार जांच में सामने आया कि प्रदेश के 800 में से 600 नर्सिंग कॉलेजों में कई सारी कमियां पायी गई.
जिन नर्सिंग कॉलेजों को अपात्र घोषित किया गया, उनमें इमारत, प्रयोगशाला, लाइब्रेरी, अनुभवी टीचर और 100 बिस्तरों वाले हॉस्पिटल जैसी अनिवार्य सुविधाओं की कमी पाई गई. सबसे चौंकाने वाली जानकारी सामने आई कि कई कॉलेज केवल कागजों पर चल रहे हैं. वहीं, कई प्रिंसिपल्स और टीचर्स को 15-15 महाविद्यालयों में काम करता हुआ दिखाया गया.
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28 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
इस मामले अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी. हाई कोर्ट के आदेश से साफ हो गया है कि नर्सिंग कॉलेज की प्रस्तावित परीक्षाएं अदालत की अनुमति के बाद होंगी. पहले नर्सिंग काउंसिल को आवेदन पेश करना होगा, इसके बाद न्यायालय निर्णय लेगा.