दमोह में भ्रष्टाचार और बदसलूकी का अड्डा जन अभियान परिषद! ब्लॉक समन्वयक पर छात्रों से शराब, सिगरेट मांगने का आरोप

शिकायतकर्ता आशीष रैकवार का कहना है कि ब्लॉक समन्वयक कक्षाओं में आने वाली छात्राओं से चाय मंगवाते हैं और उन्हें अपशब्द कहकर सार्वजनिक रूप से लज्जित करते हैं.
Serious allegations against the block coordinator in Damoh.

दमोह में ब्लॉक समन्वयक के खिलाफ गंभीर आरोप.

Input- अर्पित बड़कुल

MP News: मध्य प्रदेश के दमोह में सरकारी तंत्र को शर्मसार करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. जहां मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद, जिसका उद्देश्य समाज, सेवा और विकास है, वहां के ब्लॉक समन्वयक (BC) पर खुद उनके ही विभाग के परामर्शदाताओं ने प्रताड़ना और भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. पीड़ितों ने एकजुट होकर 13 अप्रैल 2026 को जिला समन्वयक को एक चिट्ठी लिखी है,जिसमें ब्लॉक समन्वयक की कार्यप्रणाली को ‘तानाशाही’ और ‘अनैतिक’ करार दिया गया है.

ब्लॉक समन्वयक छात्राओं से करते हैं बदसलूकी

शिकायतकर्ता आशीष रैकवार का कहना है कि ब्लॉक समन्वयक कक्षाओं में आने वाली छात्राओं से चाय मंगवाते हैं और उन्हें अपशब्द कहकर सार्वजनिक रूप से लज्जित करते हैं. इतना ही नहीं नशे के लिये अक्सर वह शराब, सिगरेट की डिमांड करते हैं, जो कि इनकी आदत में शामिल हैं.

शिकायतकर्ता सविता विश्वकर्मा ने बताया कि काम के बदले अवैध रूप से पैसों की मांग करते हैं, कुछ दिनों पहले 1-1 हजार रुपये की अवैध वसूली भी इनके द्वारा की गई है और स्थानीय दुकानों से नि:शुल्क कार्य करवाना, उनकी कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है. हम लोग मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं, परामर्शदाताओं ने पत्र में साफ तौर पर कहा है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं, तो उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है. अपशब्दों का प्रयोग और नौकरी में परेशान करने की धमकी देना अब रोज की बात हो गई है.

शिकायत के बाद भी एक महीने से कार्रवाई नहीं

सबसे अहम बात ये है कि एक तरफ प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण और सुशासन की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी छात्राओं और अधीनस्थ कर्मचारियों का मानसिक शोषण कर रहे हैं.

शिकायत दर्ज हुए करीब 1 माह बीतने को हैं, लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं हुई. लेट लपीत ही सही जब कार्रवाई होगी तब देखना यह है कि जिला प्रशासन और जन अभियान परिषद के वरिष्ठ अधिकारी इस ‘भ्रष्ट’ और ‘अमर्यादित’ आचरण पर क्या कड़ा रुख अपनाते हैं.

अफसरों की मेहरबानी से ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों के हौसले बुलंद!

लंबित शिकायत के सम्बंध में जब जिला समन्वयक सुशील नामदेव से जानकारी लेने चाही तो उन्होंने फोन नहीं उठाया. लेकिन जैसे ही ब्लॉक समन्वयक के आचरण को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने तत्काल फोन कट कर दिया. जिम्मेदार अधिकारी का यह रवैया बतलाता है कि जिले के अफसरों की मेहरबानी से ही ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों के हौसले बुलंद हैं.

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