MP में इस बार कमजोर मानसून! 47 जिलों में कम हो सकती है बारिश, अलनीनो इफेक्ट से खेती पर संकट मंडराया
सांकेतिक तस्वीर.
MP News: मध्य प्रदेश में नौतपा के बीच आंधी-बारिश का दौर शुरू हो गया है. शुक्रवार देर रात कई जिलों में तेज आंधी के साथ बारिश और ओले गिरे. भिंड, दमोह, मुरैना में बारिश ने काफी तबाही मचाई. हालांकि कई दिनों से भीषण गर्मी और हीटवेव से जूझ रहे लोगों को गर्मी से राहत मिली है. प्रदेश के कई इलाकों में मौसम में 10 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है. पिछले 8 दिनों से लगाातर सबसे गर्म रहने वालाे खजुराहो और नौगांव का तापमान 40 डिग्री के नीचे पहुंच गया है. इसे प्री मानसून का संकेत माना जा रहा है. लेकिन मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो इस बार मानसून में बारिश औसत से काफी कम हो सकती है. जिसके कारण खेती-किसानी को काफी नुकसान हो सकता है.
47 जिलों में कम बारिश के आसार
मध्य प्रदेश में सामान्य रूप से 37 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की जाती है. लेकिन वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस बार औसत बारिश सामान्य से कम 30 से 32 इंज तक ही हो सकती है. लगभग 47 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से कम बारिश की संभावना है. केवल ग्वालियर, भिंड, नीमच, दमोह, अनूपपुर, उज्जैन, अलीराजपुर और बड़वानी जिलों में ही सामान्य बारिश होने के आसार हैं.
जून में कमजोर रहेगा मानसून
मौसम विभाग ने 26 मई को केरल के तट पर मानसून पहुंचने की संभावना जताई थी. लेकिन मानसून केरल से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर ही रुक गया है. बताया जा रहा है कि अब 4 से 5 दिनों बाद मानसून केरल पहुंचेगा. इसके बाद देशभर में पहुंचेगा. वहीं मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां सामान्य दिनों में 10 से 15 जून के बीच मानसून पहुंचता है. लेकिन इस बार लेट होने के कारण इसके 18 से 20 जून को पहुंचने की संभावना है. एक्सपर्ट्स की मानें तो जून में कमजोर मानसून होने के कारण कम बारिश होगी और जुलाई से ज्यादा पानी गिरने के आसार हैं.
वहीं कमजोर मानसून और प्रशांत महासागर में अलनीनो इफेक्ट के बढ़ने के आसार को देखते हुए किसानों की चिंता बढ़ गई है. किसानों को फसलों के नुकसान के साथ ही सूखे का खतरा भी सता रहा है.