बस्तर में मिशन खुशहाली! एम्स-महारानी अस्पताल की टीम मिलकर बदलेगी सरेंडर नक्सलियों की जिंदगी, आंगन में फिर गूंजेगी किलकारी

CG News: यूरोलॉजिकल डॉ. अजय भंडारकर ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले ऐसे लोगों को नसबंदी रिवर्सल ऑपरेशन की सख्त जरूरत है. प्रशासन के सहयोग से इस बेहद जटिल और संवेदनशील चुनौती को स्वीकार करते हुए जगदलपुर में इस शिविर का आयोजन किया गया है.
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बस्तर: सरेंडर किए गए नक्सलियों का होगा रिकैनालाइजेशन

CG News: बस्तर से एक बेहद सकारात्मक खबर आ रही है, जहां समाज की मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों को अपना परिवार बसाने का अधिकार देने के लिए पुलिस और प्रशासन ने हाथ बढ़ाया है. एक समय था, नक्सल संगठन के दबाव में जबरिया नसबंदी कर दिया जाता था और पारिवारिक सुख से दूर कर दिया जाता था. समय के साथ हालात बदले नक्सलमुक्त बस्तर होने के बाद आज जगदलपुर में आयोजित एक विशेष मेडिकल कैंप में एम्स रायपुर के डॉक्टरों द्वारा सरेंडर नक्सलियों की नसबंदी खोलने (रिकैनालाइजेशन) के लिए स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिससे उनके जीवन में फिर से खुशियां लौट सकें.

जांच के बाद कैनालाइजेशन की प्रक्रिया होगी

कैनालाइजेशन शिविर में 28 युवा सरेंडर नक्सलियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया. विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उनकी विस्तृत जांच के बाद नसबंदी खोलने के ऑपरेशन की प्रक्रिया की जाएगी. इस पहल से लाभान्वित होने वाले आत्मसमर्पित नक्सली अपने पारिवारिक और सामाजिक जीवन में पूर्ण सहभागिता सुनिश्चित कर सकेंगे. समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन व्यतीत करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे.

उत्तर बस्तर कमेटी डिवीजन सचिव रहे राजू सलाम कहते हैं कि मैं 2003 में पीपुल्स वार पार्टी नक्सल संगठन में जॉइनिंग किया. 2009 में नक्सल संगठन में रहते मेरी शादी हुई और 2010 में मेरा नसबंदी किया गया. नक्सल संगठन के तरफ से 15 नवंबर 2025 में जगदलपुर मुख्यालय में पुनर्वास किया हूं. आज में हॉस्पिटल अपने परिवार को बढ़ाने के लिए नसबंदी खुलवाने के लिए जगदलपुर महारानी हॉस्पिटल में आया हूं.

डॉक्टर का क्या कहना है?

यूरोलॉजिकल डॉ. अजय भंडारकर ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले ऐसे लोगों को नसबंदी रिवर्सल ऑपरेशन की सख्त जरूरत है. प्रशासन के सहयोग से इस बेहद जटिल और संवेदनशील चुनौती को स्वीकार करते हुए जगदलपुर में इस शिविर का आयोजन किया गया है. तीन ऑपरेशन थिएटरों में दो दिनों के भीतर लगभग 25 से 30 ऑपरेशन करने का लक्ष्य रखा गया है. डॉक्टरों की दूसरी टीम दो हफ्ते बाद जगदलपुर पहुंचेगी, जो बाकी बचे मरीजों में से अन्य 25 से 30 लोगों का ऑपरेशन करेगी.

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‘पहले भी 52 नक्सल जोड़ों की नसबंदी खुली’

बस्तर आईजी पी सुंदरराज ने बताया कि नक्सल संगठन में पूर्व में एक साजिश के तहत नक्सल कैडर्स शादी करते थे, उन्हें पारिवारिक जीवन से वंचित रखने के लिए उनका नसबंदी कर दिया जाता था. पुनर्वास के तहत आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों का नसबंदी खोलने के लिए रिवर्स वैसेक्टोमी सर्जरी किया जा रहा है. पहले भी 52 नक्सल जोड़ों का नसबंदी खुलवाया गया है, जिनमें 23 जोड़ों का माता-पिता बनने का सुख प्राप्त हुआ है. ये परिवार अभी एक सामान्य सुखी और पारिवारिक जीवन शांतिपूर्ण तरीके से जी रहे हैं. फिलहाल में जिन्होने आत्मसमर्पण किया है, उन्होंने भी नसबंदी खुलवाने की इच्छा जाहिर की है.

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