लंबी छुट्टियों के बाद बच्चों को दोबारा स्कूल भेजने में आ रही दिक्कत? रूटीन में लाने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स
बच्चों को रूटीन में कैसे लाएं
Help Children Adjust Easily: डेढ़-दो महीने की लंबी छुट्टियों के बाद बच्चों का दोबारा स्कूल जाना और उनकी दिनचर्या को बदलना माता-पिता के लिए एक बड़ी चुनौती होती है. इस समय सुबह जल्दी उठने और बच्चों को मोबाइल या टीवी से दूर रखने में काफी परेशानी आती है. लंबे समय तक बिगड़े रूटीन और ज्यादा स्क्रीन टाइम के कारण जून के अंत या जुलाई की शुरुआत में बच्चों के अंदर स्कूल लौटने का डर, चिड़चिड़ाहट और तनाव बढ़ने लगता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि बच्चों को उनकी पुरानी वाली रूटीन में दोबारा कैसे लाएं.
बच्चों में चिड़चिड़ापन का कारण और समाधान
ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों को बाहरी दुनिया से काट देता है. इसीलिए, जब उनसे अचानक मोबाइल लिया जाता है या पढ़ाई के लिए कहा जाता है, तो वे चिड़चिड़े हो जाते हैं. बच्चों को दोबारा सही रूटीन पर लाने के लिए डांटने या सजा देने के बजाय एक नियम बनाएं. उन्हें शांत रहकर प्यार से समझाएं कि यह बदलाव उनकी भलाई और सेहत के लिए जरूरी है.
नखरा या तनाव कैसे समझें?
अक्सर माता-पिता समझ नहीं पाते कि बच्चा गैजेट्स न मिलने पर नाटक कर रहा है या स्कूल के डर से तनाव में है. असल में बच्चों का नखरा या गुस्सा दिखाना अपनी बात कहने का एक तरीका है. वे इसके जरिए बताते हैं कि वे नए रूटीन से परेशान हैं. ऐसे में बच्चे पर गुस्सा करने के बजाय थोड़ा शांत रहें, उनकी मानसिक स्थिति को समझें और उनसे प्यार से बात करने की कोशिश करें.
ग्राउंडिंग थेरेपी से दूर करें बच्चों का तनाव
स्कूल के शुरुआती दिनों में बच्चे को खुद छोड़ने जाएं और संभव हो तो पहले कुछ दिन उसे हाफ-डे के लिए ही भेजें. बच्चे से प्यार से बात करके उसे सुरक्षित महसूस कराएं और स्कूल में असहज होने पर किसी शांत कोने में बैठने या किताब पढ़ने की सलाह दें. घबराहट होने पर उसे गहरी सांस लेना और पैरों को जमीन पर टिकाकर एड़ियों को ऊपर-नीचे करने वाली ग्राउंडिंग थेरेपी सिखाएं, जिससे उसका तनाव तुरंत कम हो सके.