Ground Report: बड़वानी में नर्मदा नदी में अवैध रेत खनन का खेल जारी, कैमरे में कैद हुआ गोरखधंधा
बड़वानी: नर्मदा नदी में अवैध तरीके से रेत खनन का खेल जारी
Barwani Ground Report: (सचिन राठौड़ की रिपोर्ट) बड़वानी जिले में शनिवार (11 जुलाई) को दोपहर में जब विस्तार न्यूज की टीम जिला मुख्यालय से करीब 10 से 12 किलोमीटर दूर नर्मदा के डूब क्षेत्र में स्थित पीपलूद, बड़दा और खेड़ी गांवों की ओर पहुंची तो सामने का दृश्य चौंकाने वाला था. नर्मदा किनारे भारी-भरकम पोकलेन मशीनें लगातार नदी का सीना चीर रही थीं. गहरे गड्ढों से रेत निकालकर डंपरों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरी जा रही थी, जबकि वाहनों की आवाजाही बिना रुके जारी थी.
लंबे समय से चल रहा अवैध रेत का खनन
मौके पर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो नदी के किनारे पर एक व्यवस्थित खनन स्थल संचालित किया जा रहा हो. दूर से ही मशीनों की आवाज और रेत से भरे वाहनों की आवाजाही साफ दिखाई दे रही थी. विस्तार न्यूज की टीम ने देखा कि नदी किनारे बड़े-बड़े गड्ढे बनाकर पोकलेन मशीनों से लगातार रेत निकाली जा रही थी. निकाली गई रेत को तत्काल डंपरों में भरकर रवाना किया जा रहा था. आसपास बड़ी मात्रा में मिट्टी के ढेर भी जमा किए गए थे. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गतिविधियां एक-दो दिन नहीं, बल्कि लंबे समय से लगातार चल रही हैं.
विभाग की सक्रियता नहीं
प्रत्यक्ष रूप से मौके पर करीब छह पोकलेन मशीनें, एक दर्जन से अधिक डंपर तथा बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सक्रिय दिखाई दीं. मशीनें लगातार उत्खनन करती रहीं और वाहन रेत भरकर निकलते रहे. इससे यह सवाल भी उठता है कि इतनी बड़ी गतिविधि जिम्मेदार विभागों की नजर से कैसे ओझल रही.
रास्ते में बनाई गईं अस्थायी टपरियां
ग्रामीणों ने बताया कि पीपलूद गांव से खदान तक कई स्थानों पर अस्थायी टपरियां बनाई गई हैं. उनका दावा है कि इनका उपयोग आने-जाने वालों पर नजर रखने और गतिविधियों की सूचना देने के लिए किया जाता है. इससे पूरे क्षेत्र में संगठित तरीके से खनन होने की आशंका और गहरी होती है.
नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रेसवार्ता में भी उठा मुद्दा
इसी बीच शनिवार दोपहर नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में मेधा पाटकर ने भी जिले में जारी कथित अवैध रेत उत्खनन को लेकर जिला प्रशासन और खनिज विभाग पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के बावजूद नर्मदा तटीय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उत्खनन हो रहा है. उनका आरोप था कि बाहरी लोग रॉयल्टी और ठेके की आड़ में नियमों के विपरीत खनन कर रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं.
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पर्यावरण पर गंभीर खतरे की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नदी के किनारों पर इसी तरह अनियंत्रित खनन जारी रहा तो इससे नर्मदा के प्राकृतिक प्रवाह, तटों की स्थिरता, जैव विविधता और भविष्य में बाढ़ की स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई स्थानों पर कटाव बढ़ चुका है और नदी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है.
खनिज अधिकारी का पक्ष
इस संबंध में जिला खनिज अधिकारी दिनेश डुडवे ने बताया कि संबंधित रेत खदान का ठेका तीन वर्ष की अवधि के लिए है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मौके पर दिखाई दे रही गतिविधियां स्वीकृत क्षेत्र और निर्धारित शर्तों के अनुरूप थीं या नहीं.